पहले किताबों में घरेलू कामकाज कैसे दिखाया जाता था?
- मंत्री ने बताया कि कक्षा 1 और 2 की पाठ्यपुस्तकों में पहले घरेलू कामकाज करते हुए केवल महिलाओं को दिखाया जाता था। अब राज्य ने इस तरीके में बदलाव किया है।
- इस बदलाव के जरिए बच्चों को शुरुआत से ही घरेलू कामकाज को केवल महिलाओं की जिम्मेदारी के तौर पर देखने से बचाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा, "कक्षा 1 और 2 की पाठ्यपुस्तकों में पहले घरेलू कामकाज पूरी तरह महिलाओं द्वारा किए जाने के रूप में दिखाया जाता था। राज्य ने अब इस तरीके को बदल दिया है। अब दिखाए जाने वाले घरेलू कामकाज में 50 प्रतिशत काम पुरुषों और 50 प्रतिशत काम महिलाओं द्वारा किया जाता दिखाया जाता है। इसका उद्देश्य पहली कक्षा से ही लैंगिक रूढ़ियों से बचना है।"
शनिवार को बिना बस्ते के क्या सीखते हैं विद्यार्थी?
- नारा लोकेश ने बताया कि आंध्र प्रदेश के स्कूलों में शनिवार को ‘बिना बस्ते का दिन’ यानी नौ बैग डे मनाया जाता है।
- इस दिन बच्चों को मूल्य आधारित और व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ने वाली गतिविधियां कराई जाती हैं।
उन्होंने कहा, "गतिविधियों में परिवार के बजट और कृषि बजट के प्रबंधन से जुड़े पाठ, क्षेत्रीय भ्रमण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से परिचय शामिल हैं। विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों से परिचित कराया जा रहा है, ताकि वे इस तकनीक को समझ सकें और अपने चुने हुए क्षेत्रों में इसका प्रभावी इस्तेमाल कर सकें।"
हर 45 मिनट की कक्षा के बाद क्या होगा?
नारा लोकेश ने तकनीक की मदद से कक्षाओं को अधिक संवादात्मक बनाने की अपनी दीर्घकालिक योजना के बारे में भी बताया। उनके प्रस्ताव के अनुसार,
- हर 45 मिनट की कक्षा के बाद विद्यार्थियों को उस पाठ का सार बताने वाला 60 या 90 सेकंड का वीडियो दिखाया जाएगा।
- इसके बाद उनसे चार से पांच सवाल पूछे जाएंगे।
- क्लिकर तकनीक की मदद से विद्यार्थी इन सवालों के जवाब देंगे।
- इससे कक्षा में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
उन्होंने कहा, "उद्देश्य विद्यार्थियों को निष्क्रिय रूप से सीखने वाले से सक्रिय रूप से सीखने वाला बनाना है। सीखने से जुड़ा आंकड़ा राज्य की सीखने की प्रबंधन प्रणाली (एलएमएस) में जाएगा। इससे प्रणाली हर विद्यार्थी की पढ़ाई में मौजूद कमी की पहचान कर सकेगी और उसकी जरूरत के अनुसार गृहकार्य और लक्षित पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध करा सकेगी।"
कौन सी एप पहचानेगी विद्यार्थी की पढ़ाई की कमजोरी?
मंत्री ने एक विद्यार्थी का उदाहरण देते हुए बताया कि कोई छात्र गणित में अच्छा हो सकता है, लेकिन किसी खास विषय या अवधारणा को समझने में कमजोर हो सकता है। उन्होंने प्रायिकता का उदाहरण दिया:
उन्होंने कहा, "मान लीजिए कोई विद्यार्थी गणित में अच्छा है, लेकिन प्रायिकता जैसे किसी खास विषय में कमजोर है। प्रणाली उस खास कमी की पहचान करेगी और लीप एप के जरिए अतिरिक्त गृहकार्य और पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराएगी। यह एप अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी उपलब्ध है। इससे विद्यार्थी यह स्पष्ट रूप से समझ सकेंगे कि उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।"
इस व्यवस्था के जरिए विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सीखने की जरूरत को पहचानने और उसी के अनुसार उन्हें अतिरिक्त सामग्री देने पर जोर दिया जा रहा है।