38 PhD शोध छात्रों का मार्गदर्शन और 26 प्रोजेक्ट्स में योगदान
डॉ. जय प्रकाश पांडे ने ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में कई अहम काम किए हैं। उन्होंने भारत में ई-गवर्नेंस से जुड़े शोध को आगे बढ़ाने के लिए कई केस स्टडी, उपकरण और मॉडल तैयार किए हैं। उन्होंने 38 शोध छात्रों (PhD) का मार्गदर्शन किया है और 26 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स में सहयोग दिया है। उन्होंने ‘गवर्नमेंट ऑनलाइन’, ‘टुवर्ड्स ई-गवर्नमेंट’ और ‘प्रॉमिस ऑफ ई-गवर्नेंस’ जैसी किताबों में भी काम किया है। उनके 250 से ज्यादा शोध पत्र देश और विदेश की पत्रिकाओं और सम्मेलनों में प्रकाशित हुए हैं। इसके अलावा उन्होंने ई-गवर्नेंस पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICEG) के माध्यम से कई किताबों और शोध कार्यों के प्रकाशन में भी मदद की है।
भारत-EU डिजिटल साझेदारी के अग्रदूत
- वे भारत सरकार के डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी कार्यक्रमों पर लगातार अध्ययन और निगरानी रखते हैं।
- उनके शोध कार्यों ने इन कार्यक्रमों और विशेष रूप से भारत की साइबर सुरक्षा नीति को बेहतर बनाने में योगदान दिया है।
- वे यूरोपीय संघ (EU) द्वारा वित्त पोषित एक अंतरराष्ट्रीय परियोजना “Future Internet and Electronic Media में EU-India Cooperation Platform” का नेतृत्व कर रहे हैं।
- इस परियोजना का उद्देश्य भारत और EU के बीच स्मार्ट सिटी और भविष्य की इंटरनेट तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है।
- उनके प्रयासों से भारत में FIWARE तकनीक को लागू करने में मदद मिली, जिसे अब विश्व बैंक द्वारा कुछ स्मार्ट सिटी पायलट प्रोजेक्ट्स में दिखाया जा रहा है।
- FIWARE एक आधुनिक मिडलवेयर प्लेटफॉर्म है, जिसे यूरोप की कई टेक कंपनियों के समूह ने विकसित किया है और EU द्वारा समर्थन प्राप्त है।
- उन्होंने IIT दिल्ली में “Smart Campus@IITD” पर एक रिपोर्ट तैयार की, जो स्मार्ट कैंपस मॉडल पर आधारित थी।
- इस रिपोर्ट को 2015 में फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेले के दौरान आयोजित NEM समिट में काफी सराहना मिली।
सर्वश्रेष्ठ प्रोफेसर सम्मान से सम्मानित
डॉ. जय प्रकाश पांडे भारत में केंद्र और राज्य सरकारों की कई ICT (सूचना और संचार प्रौद्योगिकी) से जुड़ी नीति-निर्माण समितियों में शामिल रहे हैं। वे डिजिटल इंडिया अवार्ड्स, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार, डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (DSCI) और कंप्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया (CSI) जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों की जूरी में भी अपनी भूमिका निभाते हैं।
उन्हें 1996 में शास्त्री इंडो कैनेडियन इंस्टीट्यूट, कैलगरी (कनाडा) द्वारा मानविकी और सामाजिक विज्ञान (HSS) फैलोशिप से सम्मानित किया गया था। वे मैनिटोबा विश्वविद्यालय में विजिटिंग फेलो भी रह चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें 2012 में विश्व शिक्षा कांग्रेस और CMO एशिया द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रोफेसर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
किन मुद्दों पर होगी बात?
अमर उजाला संवाद में एआई पर चर्चा स्मार्ट शिक्षा और इंटेलिजेंट कैंपस पर होगी। इसमें बात एआई के उपयोग से पढ़ाई को आसान और व्यक्तिगत बनाने, ऑनलाइन शिक्षा को बेहतर करने और परीक्षा प्रणाली को तेज व सटीक बनाने पर होगी। साथ ही कैंपस में स्मार्ट क्लास, सुरक्षा, उपस्थिति और प्रशासनिक कार्यों को एआई से स्वचालित और अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा होगी।