फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 558 मदरसों पर चल रही जांच पर लगाई रोक, 17 नवंबर को अगली सुनवाई

Tue, 23 Sep 2025 06:37 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Allahabad HC: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के 558 सहायता प्राप्त मदरसों के खिलाफ ईओडब्ल्यू की जांच पर रोक लगा दी है। यह जांच मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत पर एनएचआरसी के निर्देश पर हो रही थी। कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा और अगली सुनवाई 17 नवंबर तय की।
 
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Allahabad HC: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के 558 सहायता प्राप्त मदरसों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा की जा रही जांच पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के निर्देश पर हो रही थी। आयोग को यह निर्देश मोहम्मद तल्हा अंसारी नामक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर जारी किया गया था।

विज्ञापन


आयोग के आदेश और जांच को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। याचिका में 28 फरवरी, 23 अप्रैल और 11 जून को जारी एनएचआरसी के आदेशों को रद्द करने की मांग की गई। इसके साथ ही 23 अप्रैल के सरकारी आदेश को भी चुनौती दी गई, जिसके आधार पर यह जांच शुरू हुई थी। 

सोमवार को जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने इन आदेशों पर रोक लगाते हुए एनएचआरसी और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई 17 नवंबर तय की।

विज्ञापन
Trending Videos

याचिका में दी गई ये दलील

याचिका में दलील दी गई कि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 में आयोग के कार्य स्पष्ट रूप से बताए गए हैं। वहीं, धारा 36(2) के तहत आयोग किसी भी मामले की जांच उस घटना के एक वर्ष बाद नहीं कर सकता। इसके अलावा, धारा 12-ए के मुताबिक आयोग केवल स्वतः संज्ञान लेकर, पीड़ित की याचिका पर, या अदालत के आदेश पर ही जांच कर सकता है।
विज्ञापन

चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश

याचिका में कहा गया कि इस मामले में धारा 12-ए की कोई भी शर्त लागू नहीं होती। साथ ही, शिकायत में घटना की तारीख स्पष्ट नहीं है और आरोप भी अस्पष्ट हैं। ऐसे में यह तय करना संभव नहीं है कि शिकायत एक वर्ष की सीमा के भीतर दर्ज की गई थी या नहीं। इसलिए पूरी कार्यवाही को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया। हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें