याचिका में दी गई ये दलील
याचिका में दलील दी गई कि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 में आयोग के कार्य स्पष्ट रूप से बताए गए हैं। वहीं, धारा 36(2) के तहत आयोग किसी भी मामले की जांच उस घटना के एक वर्ष बाद नहीं कर सकता। इसके अलावा, धारा 12-ए के मुताबिक आयोग केवल स्वतः संज्ञान लेकर, पीड़ित की याचिका पर, या अदालत के आदेश पर ही जांच कर सकता है।
चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश
याचिका में कहा गया कि इस मामले में धारा 12-ए की कोई भी शर्त लागू नहीं होती। साथ ही, शिकायत में घटना की तारीख स्पष्ट नहीं है और आरोप भी अस्पष्ट हैं। ऐसे में यह तय करना संभव नहीं है कि शिकायत एक वर्ष की सीमा के भीतर दर्ज की गई थी या नहीं। इसलिए पूरी कार्यवाही को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया। हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।