Marathi: उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने महाराष्ट्र के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को अनिवार्य तीसरी भाषा बनाए जाने के फैसले का विरोध कर रहे दलों की कड़ी आलोचना की है।
पवार ने शुक्रवार को पिंपरी चिंचवाड़ में चापेकर बंधुओं को समर्पित एक राष्ट्रीय स्मारक के उद्घाटन के अवसर पर कहा, "मराठी हमारी मातृभाषा है और राज्य में इसे हमेशा पहली प्राथमिकता दी जाएगी।"
पवार ने कहा कि मराठी, हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन मराठी हमेशा राज्य में प्रमुखता बनाए रखेगी। उन्होंने कहा, "मराठी को बरकरार रहना चाहिए और आगे बढ़ना जारी रखना चाहिए।"
भाषा को बढ़ावा देने में केंद्र की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए पवार ने कहा, "यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे जिन्होंने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया, यह निर्णय दिल्ली में वर्षों से लंबित था। एनडीए सरकार ने इसे लागू करने का साहस दिखाया।"
उन्होंने कहा कि भाषा को और अधिक बढ़ावा देने के लिए मुंबई में मराठी भाषा भवन स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है।
कक्षा 1 से 5 के लिए त्रि-भाषा फॉर्मूला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत नए पाठ्यक्रम कार्यान्वयन का एक हिस्सा है।
राज्य स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूली शिक्षा के लिए एनईपी 2020 की सिफारिशों के अनुसार तैयार किए गए नए पाठ्यक्रम ढांचे की चरणबद्ध कार्यान्वयन योजना घोषित की है।