AIU ने कुलपतियों को क्या लिखा?
जारी पत्र में कहा गया है कि हाल के दिनों में कुछ राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों के कारण कई छात्र कक्षाओं से दूर रहकर विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल हो रहे हैं। एआईयू ने इसे चिंता का विषय बताया है।
छात्रों की चिंताओं को बताया महत्वपूर्ण
एआईयू ने अपने पत्र में कहा है कि छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनकी बातों को सहानुभूति और सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए। हालांकि, संगठन का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन का सबसे अधिक नुकसान छात्रों को ही उठाना पड़ता है।
पत्र में कहा गया है कि ऐसे आंदोलनों से पढ़ाई प्रभावित होती है, परीक्षा की तैयारी पर असर पड़ता है और छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बढ़ता है।
विश्वविद्यालयों से भावनात्मक सहयोग देने की अपील
एआईयू ने सभी कुलपतियों और संस्थानों के प्रमुखों से कहा है कि वे छात्रों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें, उनका मार्गदर्शन करें और उन्हें भावनात्मक सहयोग भी दें। पत्र में उम्मीद जताई गई है कि संस्थानों के नेतृत्व और सहयोग से परिसर का माहौल शांत रहेगा और छात्र अपनी पूरी ऊर्जा पढ़ाई तथा राष्ट्र निर्माण में लगा सकेंगे।