ये मिलेगी बड़ी राहत
नई गाइडलाइन में अब कंपनियों को सॉफ्टवेयर में छोटे बदलावों के लिए नया लाइसेंस नहीं लेना पड़ेगा। अब एल्गोरिद्म जैसे अपडेट भी लागू किए जा सकेंगे। साथ ही टेस्ट लाइसेंस और व्यावसायिक लाइसेंस लेने की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में आसान और स्पष्ट कर दी गई है।
नई गाइडलाइन क्यों जरूरी है?
अस्पतालों और क्लीनिकों में मेडिकल सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। एआई आधारित जांच, बीमारी की निगरानी और इलाज में इनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। लेकिन मेडिकल डिवाइस नियम-2017 मुख्य रूप से मेडिकल मशीनों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। इसलिए सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों, आयातकों और शोधकर्ताओं को कई बातों में परेशानी होती थी।