विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालयों में होगा क्रियान्वयन
वहीं, विद्या भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष डी रामकृष्ण राव ने कहा कि स्वतंत्रता के 75 वर्ष तथा 1986 में घोषित नई शिक्षा नीति के 35 वर्ष बाद भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी परिवर्तन होने के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि विगत 70 वर्षों से शिक्षा क्षेत्र में निरंतर कार्यरत संगठन के रूप में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान बुनियादी स्तर के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2022 का स्वागत करता है। राव ने कहा कि विद्या भारती प्रधानमंत्री एवं शिक्षा मंत्री, तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रारूप तैयार करने में जिनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, ऐसे प्रख्यात वैज्ञानिक-शिक्षाविद डॉ के कस्तूरीरंगन तथा उनकी पूरी टीम का हार्दिक अभिनंदन करता है। साथ ही, संस्थान इसके क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग करने की भी आश्वस्ति देता है।
एक दिन पहले शिक्षा मंत्री ने किया था शुभारंभ
आपको बता दें कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को तीन से आठ साल के बच्चों के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा का शुभारंभ किया था। यह पहली बार है जब आधारभूत चरण के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया गया है और तीन वर्ष की आयु के बच्चों को औपचारिक स्कूली शिक्षा प्रणाली में लाया जाएगा, जैसा कि एनईपी में प्रस्तावित है।
शिक्षा मंत्री ने की अपील
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के शुभारंभ के दौरान कहा कि एनसीएफ (नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क) नई शिक्षा नीति-2020 को लागू करने के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। मैं राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से भी अपील करता हूं कि अगले बसंत पंचमी तक पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों को पूरा करें।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के चार चरण
राष्ट्रीय शिक्षा नीति, एनईपी 2020 द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2022 तैयार की गई है। इसके अनुसार, पाठ्यक्रम में चार क्षेत्र शामिल होंगे- स्कूली शिक्षा, प्रारंभिक बचपन और शिक्षा, शिक्षक शिक्षा और वयस्क शिक्षा। नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क ने बच्चों की शिक्षा के लिए 'पंचकोष' की अवधारणा को बताया है। इसके पांच भाग हैं। शारीरिक विकास, प्राणिक विकास, भावनात्मक और मानसिक विकास, बौद्धिक विकास और आध्यात्मिक विकास (चैतिक विकास) हैं।