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इन्वर्टिस विश्वविद्यालय में मिला एसिड अटैक सर्वाइवर्स को इस अपराध के खिलाफ लड़ने का बल

Tue, 10 Apr 2018 12:41 PM IST
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इन्वर्टिस विश्वविद्यालय में प्रोत्साहना सत्र का आयोजन
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इन्वर्टिस विश्वविद्यालय में एसिड अटैक सर्वाइवर द्वारा एक प्रोत्साहना सत्र आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की पहल इन्वर्टिस के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा की गयी जिसका उद्देश्य समाज में हो रहे निंदनीय प्रयास पर रोक लगाने और उसके प्रति लोगों को जागरूक करना था। 
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इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छांव फाउंडेशन के निदेशक आलोक दीक्षित, सह निदेशक दुर्गा प्रसाद शुक्ला, शीरोज एवं छांव की सदस्य अंशु राजपूत रहीं जो खुद इस अपराध का
शिकार हुई थी। छांव फाउंडेशन एक संस्थान है जो उन सभी के लिए लड़ता है और हर संभव मदद प्रदान करता है जो इस अपराध का शिकार हो जाते हैं। 

शीरोज़ भी उसी संस्थान का एक हिस्सा है जो आगरा एवं लखनऊ में, संस्थान कैफे के रूप में इन पीड़ितों को रोज़गार देकर सशक्त बनाने का कार्य करता है। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा की गयी इस पहल के ज़रिये इन्वर्टिस विश्वविद्यालय ने इस संस्थान को पचास हजार की आर्थिक सहयोग प्रदान की। 
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जिसमे पूरे विश्वविद्यालय ने अपना योगदान दिया। इस धनराशि के जरिये इस संस्थान को अपराध के खिलाफ लड़ने के लिए और महिलाओं के उपचार के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। 

छांव फाउंडेशन के निदेशक आलोक दीक्षित ने इस संस्थान के बारे में चर्चा करते हुए छांव फाउंडेशन को स्थापित करने के सफर एवं उसमे आई मुश्किलों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि किस तरह आज भी समाज अपराधियों को पनाह देता है और पीड़िताओं को अपनाने से कतराता है जबकि उसमे उनकी कोई गलती नहीं होती। 

उन्होंने बताया कि किस तरह छांव के जरिये उन सभी को इंसाफ दिलाने की कोशिश करते हैं और उन्हें पुनः आत्मनिर्भर बनाकर यह एहसास दिलाते हैं कि वो किसी से कम नहीं है। छात्रों को संबोधित करते हुए श्री आलोक दीक्षित ने कहा कि तेजाब तो सिर्फ एक जरिया है, असली तेजाब तो इंसान के दिमाग में होता है जिसे खत्म करके ही इस कुप्रथा को रोका जा सकता है। 

अगर पुरुष खुद को एक प्रतिशत भी महिला की जगह रख कर सोचें तो ऐसी घटनाओं पर अवश्य ही रोक लग जायेगी। अंत में उन्होंने सभी से आग्रह किया की महिला समाज का एक अभिन्न हिस्सा है अतः हमें उनकी इज्जत कर उन्हें एक महान दर्जा देना चाहिए। हमले के बाद उनका चेहरा ही नहीं बल्कि उनका आत्मबल भी टूट जाता है जिसे समाज ही दुबारा खड़ा कर सकता है। 
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इन्वर्टिस विश्वविद्यालय ने दिया आर्थिक सहयोग
एसिड अटैक सर्वाइवर अंशु राजपूत ने अपने जीवन के बारे में बताया उन्होंने अपनी आत्मकथा सांझा करते हुए कहा कि किस तरह मात्र 15 वर्ष की उम्र में उनके साथ यह घिनौना अपराध हुआ और सबसे चौंका देने वाली बात यह है की यह हमला किसी युवक ने नहीं बल्कि उनके पड़ोस में रहने वाले 55 वर्ष के एक अधेड़ आदमी ने किया जिसे वह अपने दादा जी की तरह मानती थी, अपनी उम्र से आधी उम्र की बालिका को जब अपने प्यार का प्रास्ताव ठुकराते हुए देखा तो उसे लगा की यह उसकी मर्दानगी पर एक सवाल है और उसने अपने अपमान का बदला अंशु के चेहरे पर तेजाब फेंक कर लिया। 

उन्होंने बताया कि किस तरह हमले के बाद उनकी जिंदिगी पूरी तरह से बदल गयी जलने के दर्द से बड़ा वो दर्द था जो समाज ने उन्हें और उनकी पीड़ा को नज़रंदाज़ करके दिया, उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ इस बात की होती थी जब कोई उनके पास बैठने से भी इनकार कर देता था, लोग उन्हें इस तरह से देखते थे जैसे अपराधी कोई और नहीं वह खुद है।


शेरोज के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में शेरोज और छांव का बहुत बड़ा योगदान है शेरोज में आने के बाद ही उनका खोया हुआ आत्मविश्वास उन्हें वापिस मिल गया है। अंत में उन्होंने सबसे यही अनुरोध किया की हमे पीड़िता न कहे हम पीड़ित नही है हम “सर्वाइवर” है।

इन्वर्टिस की चीफ एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन सोनल गौतम ने इस कार्यक्रम को सराहते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए महिलाओं के साथ युवाओं को आगे आने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि महिला के बिना समाज संभव नहीं है, एक सशक्त समाज के लिए महिला को प्रतिष्ठित दर्ज़ा मिलना चाहिए, यदि महिलाएं अपने बच्चों एवं भाईओं को बचपन से ही औरत की इज्जत करने की शिक्षा दें तो आने वाले समाज में ऐसे अपराध होंगे ही नहीं।

इन्वर्टिस विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.जगदीश राय ने इस कार्यक्रम के बारे में बताते हुए अतिथियों के कार्य को सराहा और कहा कि ऐसी घटनाएं सिर्फ हमारे सतर्कता से रुकेगी। नैतिक ज्ञान देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे कार्य करते समय उन लोगों को अपनी इंसानियत पर शर्म करना चाहिए। महिला सशक्तिकरण पर बात करते हुए कहा कि अब समय आ गया है महिलाओं को आत्मरक्षा स्वयं करनी पड़ेगी अगर उन्हें ऐसे अपराधों को रोकना है।

डीन इंजीनियरिंग डॉ.आरके शुक्ला ने कहा कि महिलाओं को जुडो कराटे एवं मार्शिअल आर्ट सीखना चाहिए जिससे उन्हें ऐसी घटनाओं से लड़ने के लिए आत्मबल मिलेगा।
इस दौरान छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिये सभी का मनोरंजन किया साथ ही समाज को इस अपराध को रोकने के लिए सन्देश दिया। 

कार्यक्रम के दौरान इनवर्टिस की चीफ एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन सोनल गौतम , कुलपति प्रो.जगदीश राय, डीन इंजीनियरिंग डॉ.आरके शुक्ला, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ.पी.पी.सिंह, रजिस्ट्रार संतोष कुमार, पत्रकारिता विभागाध्यक्ष प्रो.आशीष चटर्जी, प्रो.उत्कर्ष मिश्र, प्रो.प्रदीप्ता घोष, प्रो.अंकिता भाटिया अन्य विभागाध्यक्ष शिक्षकगण एवं छात्र उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी प्रो.उत्कर्ष मिश्र ने किया।

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