नीतियां और समितियां मौजूद, पर सुरक्षा क्यों नाकाफी?
आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र (2004 बैच) और ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के संस्थापक धीरज सिंह ने आईआईटी कानपुर में बढ़ती आत्महत्याओं को लेकर सर्वोच्च स्तर पर सीधी जवाबदेही की मांग की है। उनके मुताबिक, पिछले दो वर्षों में IIT में हुई कुल आत्महत्याओं में से लगभग 30 प्रतिशत मामले केवल IIT कानपुर कैंपस से सामने आए हैं। उनका कहना है कि जब किसी एक संस्थान में इतनी बड़ी संख्या में आत्महत्याएं होती हैं, तो इसे सिर्फ छात्रों की व्यक्तिगत कमजोरी या पढ़ाई के दबाव के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह साफ तौर पर संस्थागत विफलता की ओर इशारा करता है।
धीरज सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य कोई हल्का मुद्दा नहीं है और सुप्रीम कोर्ट भी इसे जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का अहम हिस्सा मानता है, जिससे यह संस्थानों की संवैधानिक जिम्मेदारी बन जाती है। उन्होंने बताया कि नीतियां, समितियां और काउंसलिंग सेंटर मौजूद होने के बावजूद जवाबदेही की कमी सबसे बड़ी समस्या है। अगर देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान भी अपने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं, तो यह संसाधनों की नहीं बल्कि प्रशासन और शासन की गंभीर नाकामी है, और अब जरूरत है संवेदना से आगे बढ़कर ठोस परिणाम और जिम्मेदारी तय करने की।