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छात्र आत्महत्या: पांच वर्षों में 23 आईआईटी में 45 छात्रों ने दी जान, इनमें आरक्षित वर्ग के कितने बच्चे?

Wed, 23 Sep 2026 03:25 PM IST
शाहीन परवीन पीटीआई, नई दिल्ली

सार

पिछले पांच वर्षों में देश के 23 आईआईटी में छात्रों की आत्महत्या के 45 मामले सामने आए हैं। इनमें 28 छात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से थे। आंकड़ों से जानें, किस वर्ष सबसे अधिक मामले सामने आए।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI
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विस्तार
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आईआईटी में छात्रों की आत्महत्या के मामलों से जुड़ा सरकारी आंकड़ा सामने आया है। आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 से 2024-25 के बीच देश के 23 इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IITs) में छात्रों की आत्महत्या के 45 मामले सामने आए। इनमें से 28 मामले अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों के छात्रों से जुड़े थे।

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ये आंकड़े 8 दिसंबर, 2025 को लोकसभा में पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के जवाब के लिए सभी IITs से जुटाई गई जानकारी के आधार पर तैयार किए गए थे। तारांकित प्रश्नों का जवाब सदन में मौखिक रूप से दिया जाता है। 

आईआईटी में आत्महत्या के मामलों में 2023-24 में तेज बढ़ोतरी

इस अवधि में आईआईटी में हुई कुल आत्महत्याओं में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के 28 छात्रों की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत से अधिक रही। इनमें 12 छात्र ओबीसी, नौ एससी और सात एसटी समुदाय से थे। वहीं, 16 छात्र सामान्य वर्ग और एक छात्र ईडब्ल्यूएस श्रेणी से था।

आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में आत्महत्या के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई। उस साल आईआईटी में 16 छात्रों ने आत्महत्या की, जबकि 2022-23 में यह संख्या छह थी। इसके बाद 2024-25 में आत्महत्या के 13 मामले सामने आए।

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इन पांच वर्षों में IIT-हैदराबाद में आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले (सात) सामने आए। IIT-खड़गपुर, IIT-दिल्ली और IIT-कानपुर में छह-छह मामले दर्ज किए गए, जबकि IIT-मद्रास में पांच और IIT (BHU)-वाराणसी में चार मामले सामने आए।

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रिपोर्ट में आत्महत्या और अस्वाभाविक मौतों के आंकड़े अलग-अलग

2024-25 में आत्महत्या करने वाले 13 छात्रों में से चार OBC, तीन ST और दो SC समुदाय से थे, जबकि चार सामान्य श्रेणी से थे। इस रिपोर्ट में पांच वर्षों के दौरान हुई आठ 'अस्वाभाविक मौतों' (unnatural deaths) का भी अलग से ज़िक्र है। इन्हें आत्महत्या के 45 मामलों की संख्या में शामिल नहीं किया गया है।

हालांकि, इस दस्तावेज में आत्महत्या करने वाले छात्रों के कोर्स या उनकी मौत के हालात के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए, इन आंकड़ों के आधार पर मौत के कारणों के बारे में कोई नतीजा नहीं निकाला जा सकता। यह रिपोर्ट लोकसभा के 'प्रोविजनली एडमिटेड स्टार्ड डायरी नंबर 3682' (दिनांक 8 दिसंबर, 2025) के सिलसिले में तैयार की गई थी।
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