कैसे हुई घटना?
पुलिस के अनुसार, यह एक 'डेयर गेम' था, जिसमें छात्र एक-दूसरे को चुनौती दे रहे थे कि यदि वे खुद को ब्लेड से घायल नहीं करेंगे तो उन्हें 10 रुपये देने होंगे। इस चैलेंज को पूरा करने के लिए लगभग 20-25 बच्चों ने अपने हाथों पर चोटें पहुंचाईं।
अभिभावकों की चिंता और पुलिस की जांच
घटना के बाद स्कूल में अभिभावक-शिक्षक बैठक बुलाई गई। हालांकि, कुछ चिंतित अभिभावकों ने पुलिस से मामले की जांच की मांग की।
डिप्टी एसपी जयवीर गढ़वी ने बताया कि मामले में कोई अपराध करने की मंशा नहीं दिखी है, लेकिन यदि किसी प्रकार का आपराधिक कृत्य सामने आता है, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों की मानसिक सेहत पर ध्यान देने की जरूरत
स्कूल में करीब 300 छात्र पढ़ते हैं, और इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है।
जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी किशोर मियाणी ने बताया कि छात्रों की काउंसलिंग कराई जाएगी और अभिभावकों व शिक्षकों के साथ चर्चा की जाएगी ताकि यह समझा जा सके कि बच्चों को ऐसा करने के लिए किसने प्रेरित किया।
अब स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए नए सुरक्षा उपायों पर विचार कर रहा है।