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JEE Exam 2025: जेईई रिट याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख स्पष्ट, एकल न्यायाधीश के आदेश को मिली मंजूरी

Sun, 04 Jan 2026 02:48 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

JEE Controversy: जेईई परीक्षा 2025 से जुड़े विवाद पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपना रुख साफ कर दिया है। खंडपीठ ने एनटीए के खिलाफ याचिका खारिज करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
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JEE Advanced 2026 - फोटो : jeeadv.ac.in
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विस्तार
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Delhi High Court: दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के खिलाफ दो जेईई उम्मीदवारों द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें 2025 की प्रवेश परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।

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हालांकि, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने दोनों याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना लगाने के आदेश में संशोधन किया और उन्हें इसके बजाय एक महीने के लिए सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया।

दोनों न्यायाधीश उन याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर अपील की सुनवाई कर रहे थे, जिन्होंने एकल न्यायाधीश के 22 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके दावों को यह मानते हुए खारिज कर दिया गया था कि उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए उत्तर पत्र वास्तविक नहीं थे।

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स्कोरकार्ड मामले में जुर्माना और सेवा का आदेश

न्यायाधीश ने राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (NFCL) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर विचार किया और दोनों आवेदकों में से प्रत्येक पर 30,000 रुपये का जुर्माना लगाया।

22 दिसंबर के एक आदेश में, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपीलकर्ताओं में से एक को 15 मई से 15 जून तक एक महीने के लिए, "सभी दिनों में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच" वृद्धाश्रम में सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया।

दूसरे अपीलकर्ता को गाजियाबाद के एक बाल देखभाल केंद्र में उतनी ही अवधि के लिए सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया गया है।

खंडपीठ ने गौर किया कि पिछला आदेश फोरेंसिक रिपोर्ट पर आधारित था, जिसमें पाया गया कि कथित स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के समय से संबंधित महत्वपूर्ण ब्राउजर लॉग अपीलकर्ताओं के उपकरणों से गायब थे।
 
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हाईकोर्ट ने छात्रों के दावों को खारिज

पीठ ने कहा, "हमें एकल न्यायाधीश द्वारा दिए गए तर्क या निष्कर्षों में कोई खामी नहीं मिली।"  

इसमें यह भी कहा गया कि छात्रों द्वारा किए गए दावे "गणितीय रूप से असंगत और स्थापित परीक्षा प्रक्रियाओं के विपरीत" थे, और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे "तथ्यों के विवादित प्रश्नों और हेरफेर के आरोपों" से संबंधित थे, जिनका संवैधानिक न्यायालय द्वारा अपने रिट क्षेत्राधिकार में निर्णय नहीं किया जा सकता था।

पीठ ने एनटीए के वकील की इस दलील पर ध्यान दिया कि यद्यपि दोनों उम्मीदवारों को 2025 और 2026 की जेईई परीक्षाओं में बैठने से रोक दिया गया था, लेकिन उन्हें किसी अन्य परीक्षा में बैठने से नहीं रोका गया था।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रतिबंध को "उनके भविष्य के शैक्षणिक प्रयासों के लिए एक कलंक के रूप में नहीं माना जाएगा।"
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