शिक्षकों ने बढ़ाया हौसला, दी हिम्मत
दिशा के शिक्षक शिवलिंग नागापुरे ने उनके इस संघर्षपूर्ण समय में सहारा दिया। नागापुरे ने लातूर डिवीजनल बोर्ड के अध्यक्ष सुधाकर तेलंग से संपर्क किया और उन्हें दिशा की स्थिति से अवगत कराया। तेलंग ने दिशा से स्वयं बात की और उन्हें परीक्षा न छोड़ने के लिए प्रेरित किया।
दिशा ने अपने आंसू पोछे, खुद को संभाला और पिता को अंतिम विदाई देकर औसा के अजीम हाई स्कूल में परीक्षा देने के लिए निकल पड़ीं। जब वह परीक्षा हॉल में उत्तर लिख रही थीं, उसी समय भादा गांव में उनके पिता का अंतिम संस्कार किया जा रहा था।
परिवार और गांववालों को है गर्व
दिशा के परिवार में उनकी दादी, मां और छोटा भाई हैं। पूरे गांव को दिशा पर गर्व है, जिन्होंने इस कठिन समय में भी अपनी शिक्षा को प्राथमिकता दी।
भादा गांव के निवासी प्रेमनाथ लाटूरे ने बताया कि जब दिशा औसा में परीक्षा दे रही थी, तब उनके पिता की अंतिम क्रियाएं गांव में पूरी की जा रही थीं। उनकी यह हिम्मत न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि हर विद्यार्थी के लिए प्रेरणा है, जो कठिनाइयों के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ते।