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मन की हर चिंता दूर करती है मां चिंतपूर्णी

Thu, 24 Jul 2014 03:10 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला
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माता चिंतापूर्णी मन की हर तरह की चिंता को दूर कर सुख प्रदान करती हैं। वे पहाड़ों की नौ देवियों और देश के 52 शक्तिपीठों में से एक हैं। चिंतपूर्णी देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित है।
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मंदिर की कथा - पौराणिक कथा के अनुसार यहां पर शिव तांडव के दौरान माता सती के चरण गिर थे। इसलिए भक्तों में माता चरणों का स्पर्श करने को लेकर अगाध श्रद्धा है। चिंतपूर्णी देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के सोला सिग्ही श्रेणी की पहाड़ी पर छपरोह गांव में स्थित है।

अब ये स्थान चिंतपूर्णी के नाम से ही जाना जाता है। कहा जाता है चिंतपूर्णी देवी की खोज भक्त माई दास ने की थी। माई दास पटियाला रियासत के अठरनामी गांव के निवासी थे। वे मां के अनन्य भक्त थे। उनकी चिंता का निवारण माता ने सपने में आकर किया था।
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मंदिर के पास भक्त माईदास का ढूंढा हुआ सरोवर भी है जिसके जल से वे माता की नियमित पूजा किया करते थे। अभी भी भक्त इस सुंदर तालाब से जल लेकर माता की पूजा करते हैं। तालाब तक जाने के लिए 200 सीढ़ियां उतरनी पड़ती है। मां के मंदिर का मुख्य प्रसाद हलवा है।

नवरात्र में विशाल मेला - चिंतपूर्णी मंदिर में चैत्र और शरद नवरात्र के समय विशाल मेला लगता है। तब यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के आसपास आधा किलोमीटर लंबा सुंदर बाजार है। चिंतपूर्णी में पंजाब के अलग-अलग शहरों के लोगों ने रहने के लिए कई धर्मशालाओं का भी निर्माण कराया है।

कैसे पहुंचे - मनोरम पहाड़ों के बीच समुद्र स्तर से ऊपर 940 मीटर ( लगभग 3000 फीट) की ऊंचाई पर मां का दरबार स्थित है। मंदिर ऊना जिले के हिल स्टेशन भरवाई से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर है।

यहां पहुंचने के लिए पंजाब के होशियारपुर शहर से बसें मिल जाती हैं। यह पुनीत स्थल पंजाब के होशियारपुर रेलवे स्टेशन से 36 मील की दूरी पर है। वैसे यहां पठानकोट जोगिंदर नगर रेल मार्ग से पहुंचा जा सकता है। निकटम रेलवे स्टेशन ज्वालामुखी रोड है जो यहां से 21 किलोमीटर की दूरी पर है।
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