कुंभ मतलब ही होता है मेला। इस मेले में हर तरफ धर्म है और जो यहां आता है, वह भी इसके रंग में रंग जाता है। दुनिया भर से लोग इस धार्मिक अजूबे को देखने के लिए लंबा इंतजार करते हैं, क्योंकि यह हर 6 या 12 साल के बाद पड़ता है। इलाहाबाद में आयोजित पिछले महाकुंभ में एक खास दिन पूरे शहर की आबादी 3 करोड़ से भी ऊपर चली गई थी और उस दिन यह दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर तक बन गया था। इस प्रसिद्घ मेले में श्रृद्घालुओं के लिए सुविधाओं के इंतजाम भी किये गये हैं।
- मेलास्थल में अखाड़ों, साधु-संतों और कल्पवासियों के लिए तंबुओं की नगरी के साथ पांटून पुल, बिजली, पानी, सीवरेज, सड़क का जाल बिछाया जा रहा है।
- मेला क्षेत्र में गंगा के इस पार से उस पार जाने के लिए 17 पांटून पुल बनाए जा रहे हैं।
- अखाड़ों के साधु-संतों, कल्पवासियों के साथ सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं के एक लाख से अधिक टेंट लगाए जा रहे हैं।
- मेला क्षेत्र को जगमगाने के लिए 200 किलोमीटर तार लगाने के साथ 12000 स्ट्रीट लाइट लगाई जा रही हैं।
- मेला क्षेत्र में 167.70 किलोमीटर चकर्ड प्लेट सड़क तैयार की जा रही है। इसमें 46000 चकर्ड प्लेट का इस्तेमाल होगा।
- मेला क्षेत्र में एक से दूसरे स्थान की दूरी बताने के लिए 100.60 किलोमीटर माइल स्टोन लगाया जा रहा है।
- पेयजल व्यवस्था के लिए पूरे क्षेत्र में 573 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई जा रही है। इसमें 40 ट्यूबवेल और तीन ओवरहेड टैंक से जलापूर्ति की जाएगी।
- अखाड़ों, संस्थाओं और कल्पवासियों के शिविर में पेयजल के 20000 कनेक्शन दिए जाएंगे।
- गंदे पानी की निकासी के लिए 300 किलोमीटर नाली बनाई जा रही है जबकि 30 किलोमीटर सीवर लाइन भी बिछाई जा रही है।
- कल्पवासियों की सुविधा के लिए मेला क्षेत्र में एक केंद्रीय चिकित्सालय सहित 20 बेड के 10 अस्पताल, दो संक्रामक रोग अस्पताल एवं एक पुलिस अस्पताल बनाया जा रहा है।