हरी भरी वादियां और उनके बीच निरंतर बहती ठंडी हवाएं। शिमला से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पर्यटक नगरी चायल अपनी इसी पहचान के लिए सैलानियों की पहली पसंद बनता जा रहा है। हर साल हजारों सैलानी गर्मियों में सुकून पाने के लिए इस छोटे से पर्यटक स्थल पर जाना नहीं भूलते हैं।
अपनी खूबसूरती और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के लिए प्रसिद्घ यह स्थल अपनी एक अलग पहचान बनाता जा रहा है।
इतिहास पर नजर डालें तो पटियाला के राजा भूपिंद्र सिंह ने इस नगरी को बसाया था।
उस समय भूपिंद्र सिंह को समर कैपिटल कही जाने वाली हिल्स क्वीन शिमला से निकाला गया था। गर्मियों के महीनों में ठहरने के लिए उन्होंने चायल को अपनी नई राजधानी बना लिया।
2226 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह नगरी उस समय भी ब्रिटिश शासकों के अधीन थी। वर्ष 1891 में महाराजा ने यहां करीब 75 एकड़ एरिया में अपना महल बनाया।
सबसे ऊंचे क्रिकेट ग्राउंड के लिए भी प्रसद्घि है चायल
चायल में दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट मैदान भी है। यह चायल बाजार से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह वर्ष 1893 में बनाया गया था। साथ ही यहां सिद्घ बाबा का मंदिर भी है। कहा जाता है कि महाराजा भूपिंद्र सिंह पहले इस जगह पर अपना महल बनाना चाहते थे। लेकिन सिद्घ बाबा उनके सपनों में आए और कहा कि इस जगह पर उनका मंदिर बनना चाहिए।
इसके बाद महाराजा ने दूसरी जगह पर अपना महल बना लिया। चायल से 8 किलोमीटर की दूरी पर काली का टिब्बा है। यहां पहाड़ी की चोटी पर मां काली का भव्य मंदिर बनाया गया है। 17 किलोमीटर दूर अश्वनी नदी के किनारे बसा साधुपूल शहर भी दर्शनीय स्थल है।
आप ऐसे पहुंच सकते हैं चायल
शिमला से वाया कुफरी होते हुए चायल पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा वाया कंडाघाट और जुनगा से भी चायल जाने के रास्ते हैं। यहां पहुंचने के लिए बस के साथ साथ प्राइवेट टैक्सियों की भी सुविधा है। 29 किलोमीटर दूरी पर स्थित कंड़ाघाट रेलवे स्टेशन है।