माघ मेला क्षेत्र में एक तरफ पुलिस प्रशासन सुरक्षा के तगडे़ इंतजाम का दावे कर रहे हैं तो वहीं आलम यह है कि सुरक्षा बलों की आंखों के सामने संगम तट के आसपास झांड़-फूंक का खेल चल रहा है, जिसमें भोले-भाले श्रद्धालुओं को तंत्र-मंत्र के नाम पर लूटा जा रहा है। अंध विश्वास का यह खेल बुधवार को मकर संक्राति पर संगम क्षेत्र पर कई जगह दिखाई पड़ा। दोपहर में साधु वेशधारी कई महिला का झाड़-फूंक करते नजर आए। इस झाड़फूंक घटनाक्रम के दौरान महिलाएं ठंड से ठिठुरती रहीं।
संगम नोज पर बुधवार की दोपहर दो बजे एक महिला आसमानी कलर की साड़ी पहने बैठी हुई थी। उसका चेहरा भी ढका हुआ था। उसके पास दो और उम्र दराज महिलाएं और दो बुजुर्ग बैठे हुए थे। एक साधु वेशधारी लगातार मंत्र पढ़कर कभी महिला पर फूंकता तो कभी अपने पास रखी छड़ी से पीट भी देता। इससे महिला चिल्ला उठती। साधु वेशधारी कई बार महिला से पूछताछ भी करता। महिला उसकी ओर झुकी हुई थी। बीच-बीच में वह संगम की रेती पर फैले पुआल पर साधु वेशधारी की तरफ झुक भी जाती। यह सब नजारा आधे घंटे तक संगम नोज पर चलता रहा और संगम में डुबकी लगाने वाले तमासबीन बने रहे। संगम पर सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस भी चुपचाप यह सब देखती रही। जिस महिला के साथ यह सब कुछ चल रहा था वह बुरी तरह से ठंड से कांप रही थी। आधे घंटे बाद झाड़फूंक का खेल खत्म हुआ। उसके बाद महिला ने गर्म कपड़े पहने और साल ओढ़ा तब जाकर उसे कुछ राहत मिली।
संगम क्षेत्र पर झाड़-फूंक का मामला पिछले वर्ष भी सामने आया था। इसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई थी। हाईकोर्ट ने मामले को स्वत: संज्ञान भी लिया था। प्रदेश सरकार को निर्देश देते हुए ओझाई के खिलाफ कार्रवाई को कहा था। कोर्ट के निर्देश पर संगम पर झाड़-फूंक करने वालों के खिलाफ दारागंज थाने में कार्रवाई भी हुई थी। पुलिस ने कार्रवाई रिपोर्ट को हाईकोर्ट में भी प्रस्तुत किया था लेकिन उसके बाद फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जिसके चलते झाड़फूंक करने वालों का मन बढ़ गया। बुधवार को संगम नगरी में जब सब मोक्ष पाने के लिए डुबकी लगा रहे थे, उसी समय संगम पर अंधविश्वास का खुला खेल चलता रहा।