सेक्टर 7 बी में आर्य समाज के 55वें वार्षिक उत्सव के दौरान डॉ. सोमदेव
शास्त्रत्त्ी ने शनिवार को कहा कि स्वामी दयानंद ने परमात्मा के अनुशासन
में ही रहने का संदेश दिया।
उन्होंने बताया कि परमात्मा के समान कोई दूसरा बंधु नहीं हो सकता है। वह हमेशा सुखदायक है। परमात्मा साक्षी और न्यायाधीश है।
शरीर और वाणी का पाप तो मनुष्य जानता है परंतु परमात्मा मन के भी पाप को जानता है। मुंबई से पधारे शास्त्री ने कहा कि अहंकार पतन का कारण होता है।
स्वामी दयानंद ने सावधान करते हुए कहा है कि माता-पिता को बच्चों को बाल्यकाल से ही संस्कारित शिक्षा देनी चाहिए कि वह अहंकार न करे।
कुरुक्षेत्र से आचार्य देवव्रत ने कहा कि आर्य का अर्थ पवित्र और श्रेष्ठ होना है। सूर्य को यह नहीं बताना पड़ता कि वह उदय हुआ है कि नहीं। प्रकाश ही इस बात का प्रमाण है।
व्यवहार और आसपास के लोग ही व्यक्ति के आचरण का पता बता सकते हैं। कानपुर से आए भजनोपदेशक पं. रविंद्र कुमार आर्य ने अपने मधुर भजनों से उपस्थित लोगों को आत्मविभोर कर दिया।