हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में कर्मचारी संगठन का एक लीडर इन दिनों खासा चर्चा में है। महोदय हर चुनाव में नेता बनने के सपने तो देखते हैं लेकिन पार्टी से हर बार इन्हें बाबा जी का ठुल्लू ही मिलता है।
संगठनात्मक चुनाव और ईसी के चुनाव में बार बार जीत दर्ज करने पर भी नेताजी अपनी कांग्रेस पार्टी से टिकट हासिल नहीं कर पा रहे। विधानसभा हो या फिर लोकसभा, चुनावी समर आते ही नेताजी भी सक्रिय हो जाते हैं। बड़े ताम झाम के साथ टिकट लेने की तैयारी शुरू हो जाती है।
नेताजी खुद को टिकट के लिए प्रबल दावेदार बताते फिरते हैं। मगर जब टिकट देने की बात आती है तो पार्टी इनके नाम पर चर्चा तक नहीं करती। हालत यह है कि इस बार लोकसभा चुनाव में भी इनकी कोई सुध नहीं ली गई। चर्चा है कि टिकट न मिलने के बाद अब नेताजी बिना कुछ किए ही राजनीति से रिटायरमेंट लेने जा रहे हैं।