नई दिल्ली। यमुना नदी की हालत पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के बावजूद यमुना और बड़े नालों के पानी की गुणवत्ता से जुड़ा ताजा डेटा पिछले तीन महीनों से सार्वजनिक नहीं किया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को हर महीने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) और नालों के पानी की गुणवत्ता की रिपोर्ट अपलोड करनी होती है। लेकिन डीपीसीसी ने आखिरी बार सितंबर महीने में यह डेटा साझा किया था। वहीं, यमुना नदी और बड़े नालों को लेकर वेबसाइट पर उपलब्ध आखिरी रिपोर्ट अक्तूबर की है। विशेषज्ञों के अनुसार, डेटा का न होना इसलिए भी ज्यादा चिंताजनक माना जा रहा है, क्योंकि सर्दियों के मौसम में यमुना की हालत आमतौर पर और खराब हो जाती है। इस समय नदी में पानी का बहाव कम हो जाता है और तापमान गिरने से प्रदूषण बढ़ता है। इसी दौरान यमुना में झाग (फोम) की समस्या भी ज्यादा देखने को मिलती है। संवाद