10 से 18 जुलाई तक यमुना में दर्ज हुआ ये रिकॉर्ड
14 जुलाई को अधिकतम जलस्तर 208.12 मीटर रहा। इसके बाद 15 जुलाई को जलस्तर 206.10 मीटर दर्ज किया गया। 16 जुलाई को जलस्तर 205.52 मीटर रहा। 16 जुलाई को जलस्तर फिर से बढ़ने लगा और यह 205.58 मीटर दर्ज किया गया और रात को 10 बजे तक जलस्तर 206 मीटर तक पहुंच गया, लेकिन 18 जुलाई को सुबह पांच बजे से यमुना का जलस्तर लगातार नीचे आता गया और रात में आठ बजे यह 205.30 मीटर दर्ज किया गया।
बारिश से कई इलाकों में भारी जलभराव
मंगलवार दोपहर को बारिश होने पर कई इलाकों में भारी जलभराव हुआ। यमुना में गिरने वाले सभी नाले अब तक खुले नहीं हैं, जिसके कारण बारिश का पानी सड़कों पर भर गया। दिल्ली सचिवालय, आईटीओ और राजघाट में भारी जलभराव रहा। दिल्ली में 13 जुलाई को यमुना 45 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए उच्चतम स्तर 208.66 मीटर पर पहुंच गई थी।
1978 में आई थी दिल्ली में भयंकर बाढ़
इससे पहले 1978 में यमुना का सर्वाधिक जलस्तर 207.49 मीटर पहुंच गया था, तब बाढ़ से दिल्ली में भारी तबाही हुई थी। 43 वर्ग किलोमीटर कृषि भूमि यमुना में समा गई थी और भारी जन-धन की हानि हुई थी, लेकिन इस बार यमुना का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ने के बावजूद उतनी जन-धन की हानि नहीं हुई, क्योंकि मौजूदा समय यमुना के करीब सभी किनारों पर पुश्ते बने हैं, जिसके कारण बाढ़ का पानी खादर क्षेत्र में ही फैला। इससे नदी के किनारे के कुछ इलाके ही डूबे। रिहायशी इलाकों में पानी नहीं पहुंच सका।
24 घंटे बाद फिर से पानी घटने लगा
मंगलवार को हथिनीकुंड बैराज से सुबह नौ बजे से 52820 क्यूसेक पानी हर घंटे छोड़ा गया, जबकि सोमवार को हर घंटे 46612 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, लेकिन यमुना का जलस्तर निरंतर ऊपर आ रहा था। मंगलवार सुबह छह बजे तक इसका जलस्तर लगातार बढ़ रहा था, लेकिन घंटे भर बाद सात बजे से फिर जलस्तर नीचे जाने लगा। माना जा रहा है कि अब यमुना जल्द खतरे के निशान से नीचे चली जाएगी।