जांच अधिकारी और नेता सहित पांच लोग पहले ही किए जा चुके हैं गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। फर्जी दस्तावेज तैयार कर एनआरआई की जमीन हड़पने के मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनको अदालत में पेश करके पूछताछ के लिए दो दिन के कस्टडी रिमांड पर लिया है। पुलिस इस मामले में जांच अधिकारी और एक नेता सहित पांच लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, एक मार्च 2022 को पूर्ण मनचंदा ने पुलिस आयुक्त को शिकायत दी कि गांव बेगमपुर खटोला में उसकी जमीन को फर्जी कागजात के आधार पर रजिस्ट्री कराकर हड़प लिया गया है। पुलिस ने जांच के बाद बादशाहपुर थाने में 16 मार्च 2022 को धोखाधड़ी, जालसाजी करने व अन्य धाराओं में केस दर्ज किया। इस मामले में पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा ने एक एसआईटी गठित कर मामले में आरोपियों व दस्तावेजों के बारे में जानकारी जुटाने के दिशा-निर्देश दिए थे। एसआईटी ने रिकॉर्ड की असल बही व जीपीए के रिकॉर्ड की जांच की तो जीपीए के रिकॉर्ड का रजिस्टर का एक पेज फटा मिला। जिसमें इस जमीन की जीपीए का इंद्राज किया गया था। इसके अलावा पुलिस ने रिकॉर्ड के कई दस्तावेज कब्जे में लिए। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जिनकी पहचान सुभाष चन्द, टोनी यादव, संजय गोस्वामी, भीम सिंह राठी व प्रदीप के रूप में हुई थी। मामले में सीआईए सेक्टर-31 की टीम ने दो और आरोपियों को काबू कर लिया। उनकी पहचान विनोद निवासी गांव धनोदा, महेंद्रगढ़ व ओमवीर निवासी गांव नरसिंहपुर, गुरुग्राम के रूप में हुई है। इसमें भीम सिंह राठी बसपा में रहे थे। वह विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, जबकि प्रदीप एएसआई हैं।
विदेश में रहने का फायदा उठाकर बनाई थी योजना
पुलिस की जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि आरोपी सुभाष चन्द यह जानता था कि शिकायतकर्ता एक एनआरआई है और अधिकतर विदेश में रहता है। उसने साथियों के साथ मिलकर एनआरआई की जमीन हड़पने के लिए फर्जी कागजात तैयार कराने व जमीन की रजिस्ट्री कराने की योजना बनाई थी। सुभाष ने अपने भतीजे वकील टोनी से जमीन के कागजात तैयार कराए। योजनानुसार सबसे पहले सुभाष चन्द ने जमीन का सिजरा, मुटेशन व सेलडीड दस्तावेज हासिल की।
रिकॉर्ड रूम से पुरानी बही से तैयार की थी फर्जी जीपीए
आरोपी सुभाष चन्द का भतीजा टोनी कालकाजी तहसील के रिकॉर्ड रूम में अस्थाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत संजय से मिला। जिसने अक्तूबर-2021 में टोनी को वर्ष-1996 की असल बही दे दी। उसके बाद कम्प्यूटर/स्केनर व सॉफ्टवेयर के जरिए सुभाष चन्द के नाम से एक फर्जी जीपीए तैयार की गई। उस फर्जी जीपीए की कॉपी वर्ष-1996 की असल बही में लगा दी। इन्होंने पूरी असल बही को कॉपी करके उस पर बही का पुराना कवर लगा दिया था। जिससे इनके द्वारा बनाया गया फर्जी जीपीए वाला कागज अलग से पहचान में न आ सके। उसके बाद वह असल बही आरोपी संजय को दे दी और संजय ने वह बही रिकॉर्ड में रख दी। रिकॉर्ड रूम से असल बही निकालने व वापस जमा करने के लिए आरोपी संजय ने पांच लाख रुपये लिए थे।
जांच अधिकारी भी गिरफ्तार
आरोपियों ने फर्जी जीपीए को आधार बनाकर शिकायतकर्ता की 15 कनाल 2 मरला जमीन को भीम सिंह राठी, शैल नारंग व ओमवीर द्वारा बताए गए विनोद नामक व्यक्तियों के नाम करा दी। आरोपियों ने करीब 40 करोड़ कीमत की जमीन को 6.6 करोड़ रुपयों में खरीदना बताकर एनआरआई व्यक्ति की जमीन को अपने नाम कर लिया था। एनआरआई की ओर से दी गई शिकायत पर दर्ज केस में जांच में एएसआई प्रदीप ने भी पैसा लेना पाया गया था। उसके खिलाफ भी भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर उसे भी गिरफ्तार किया गया था।
वर्जन
पुलिस आयुक्त विकास कुमार अरोड़ा ने कहा कि गुरुग्राम पुलिस भ्रष्टाचार में जीरो-टॉलरेंस की नीति पर कार्य करती है। किसी भी प्रकार के मामलों में यदि किसी भी पुलिस कर्मचारी/अधिकारी की संलिप्ता पाई जाती है तो उसके खिलाफ तत्परता से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।