नई दिल्ली। प्रो. श्यौराज के संघर्षों की सफलता की आत्मकथा हर उस आम बच्चे की आत्मकथा है, जो जिंदगी में आगे बढ़ना और कुछ करना चाहता है। लेखन शैली बाकी लेखकों से भिन्न है। आत्मकथा को पढ़ते समय एक जीवंत चित्र हमारे सामने उभरता है। डीयू के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने प्रसिद्ध लेखकव डीयू में प्रोफेसर श्यौराज सिंह बैचेन की आत्मकथा मेरा बचपन मेरे कंधों पर के लोकार्पण के दौरान कही। कुलपति ने कहा कि उनकी यात्रा हमें प्रेरित करती है और सिखाती है कि इच्छाशक्ति हो तो कोई भी व्यक्ति असंभव को संभव कर सकता है। कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सुधा सिंह एवं वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी भी उपस्थित रहे। पुस्तक के लेखक प्रो. श्यौराज सिंह बैचेन ने कहा कि मैंने अपने बचपन में जो दुख, अपमान और संघर्ष देखे, वे केवल मेरे निजी अनुभव नहीं थे, बल्कि उस समाज की हकीकत थे, जिसमें मैं पैदा हुआ। यह आत्मकथा उसी समाज की गवाही है। ब्यूरो