नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि किसी व्यक्ति के संदर्भ में कोई दबावपूर्ण उपाय या कोई दबावपूर्ण कदम जैसे वाक्यांशों का उपयोग जरूरी नहीं कि उस व्यक्ति के खिलाफ चल रही जांच पर रोक या निलंबन को दर्शाता हो। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि इन शब्दों का अर्थ, महत्व और प्रभाव उस संदर्भ और कार्यवाही की प्रकृति पर निर्भर करता है, जिसमें इनका उपयोग किया जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आदेश में इन शब्दों के उपयोग के पीछे अदालत के इरादे को समझने के लिए यह जांचना जरूरी है कि कार्यवाही के उस चरण में पक्षकार ने क्या राहत या संरक्षण मांगा था और अदालत ने क्या प्रदान करने का इरादा किया था। उन्होंने कहा कि इन शब्दों को कोई निश्चित या पूर्वनिर्धारित अर्थ देना न तो उचित होगा और न ही विवेकपूर्ण। ब्यूरो