चुनावी दंगल में उतर रहे उम्मीदवारों के लिए यह खबर ठीक नहीं है। अब उनकी रैली और सभाओं में सुरक्षा इंतजाम का खर्च भी उनके खाते में जुड़ेगा।
इसमें पुलिस बेरीकेड्स से लेकर केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती का खर्च भी शामिल होगा।
दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला चुनाव अधिकारी, राजनीतिक दलों और रिटर्निंग ऑफिसर को इस बारे में सूचित कर दिया है।
दिल्ली चुनाव में पहली बार यह व्यवस्था लागू की गई है। रैली की सुरक्षा का खर्च राजनीतिक दल या वह प्रत्याशी उठाएगा, जिस समूह के बारे में या जिस क्षेत्र में वह रैली आयोजित हो रही है।
अगर उस दौरान रैली में एक से अधिक प्रत्याशी मंच शेयर कर रहे हैं तो पूरा खर्च सभी प्रत्याशियों में बराबर-बराबर बांट दिया जाएगा।
रैली जहां होगी, उस क्षेत्र का जिला चुनाव अधिकारी (डीईओ) सुरक्षा खर्च की अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा।
डीईओ की जिम्मेदारी होगी कि वह राजनीतिक दलों और प्रत्याशी को रैली के आयोजन के दौरान सुरक्षा और उसके संभावित खर्च का ब्योरा पहले उपलब्ध करा दें।
रैली के तीन दिन बाद जिला चुनाव अधिकारी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों से खर्च का फाइनल ब्योरा लेकर प्रत्याशी और खर्च पर्यवेक्षक को देंगे।
चुनाव अधिकारी के मुताबिक, पूरे खर्च का ब्योरा पर्यवेक्षक अपने शैडो रजिस्टर में मेंटेन करेगा। साथ ही पूरे रैली की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी।
पूरा खर्च प्रत्याशी के 14 लाख के खर्च बजट का ही हिस्सा होगा।
पाई-पाई पर आयोग की रहेगी नजर
चुनाव आयोग ने इस बार नामांकन से पहले सभी प्रत्याशियों को नया बैंक अकाउंट खोलने को कहा है।
यह अकाउंट सिर्फ चुनाव प्रचार के दौरान होने वाले खर्च के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है।
चुनाव अधिकारियों ने बैंक अधिकारियों से इन सभी खातों पर नजर रखने और लेन-देन की जानकारी देने के लिए कहा है।
इसके लिए सभी जिलों में बैंक की ओर से एक नोडल ऑफिसर तैनात किया गया है। नोडल ऑफिसर बैंक की सभी गतिविधियों की जानकारी जिला चुनाव अधिकारी को देगा।
इसके अलावा दूसरे बैंक खाते में, जिसमें अचानक से लेन-देन बढ़ा हो उस पर भी नजर रखने के लिए कहा गया है।