'सट्टा किंग' ललित वर्मा उर्फ नीटू दिल्ली से गिरफ्तार...
-दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने दबोचा, पिछले छह साल से थी ललित की तलाश, दिल्ली पुलिस ने रखा हुआ था गिरफ्तारी पर 50 हजार का इनाम
-देशभर में आरोपी ने सट्टे की कमाई से अर्जित की 100 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी, एक समय में पूर्व सांसद व माफिया डॉन रहे डीपी यादव का रहा बेहद करीबी
-संगठित सट्टा चलाने के मामले में पुलिस ने वर्ष 2015 में भजनपुरा थाने में लगाया था आरोपी पर मकोका, तभी से था आरोपी फरार, पुलिस को लंबे समय से थी तलाश
सट्टे की दुनिया का किंग कहे जाने वाला ललिल वर्मा उर्फ नीटू (40) आखिर दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ ही गया। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने आरोपी को दिल्ली से ही दबोच लिया। मकोका के मामले में फरार चल रहे आरोपी ललित की गिरफ्तारी पर दिल्ली पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था। एक समय माफिया डॉन और पूर्व सांसद डीपी यादव का करीबी रहे ललित वर्मा ने देशभर में अपने काले धंधों से 100 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी अर्जित की हुई है। पिछले सात साल से लगातार पुलिस की आंखों में धूल झोंककर वह अलग-अलग राज्यों में अपना धंधा चला रहा था। गिरफ्तारी के बाद अपराध शाखा की टीम ने ललित को कोर्ट में पेश किया जहां से उसे 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस उससे पूछताछ कर पेरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
अपराध शाखा की पुलिस उपायुक्त मोनिका भारद्वाज ने बताया कि वर्ष 2015 में भजनपुरा थाने में 27 नवंबर को संगठित सट्टा चलाने वालों के खिलाफ मकोका का मामला दर्ज कर रोशनलाल वर्मा, अमरनाथ बजाज, योगेश्वर दयाल शर्मा व अन्यों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस की पूछताछ में रोशनलाल व अमरनाथ ने ललित वर्मा का नाम लिया। ललित रोशनलाल का बेटा था। छानबीन के दौरान पता चला कि देशभर में फैला सट्टे का कारोबार ललित वर्मा व उसके सहयोगी पुरुषोत्तम चला रहे हैं। सट्टा चलाने में उनको पूर्व सांसद व माफिया डॉन रहे डीपी यादव का भी सरंक्षण मिला हुआ है। पुलिस ने आरोपी ललित की तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। ललित के खिलाफ भी मकोका का मामला दर्ज किया गया। इस दौरान अदालत ने आरोपी ललित के खिलाफ पहले गैर जमानती वारंट जारी किए। बाद में 16 जनवरी 2017 को ललित को भगोड़ा घोषित कर दिया गया। पुलिस लगातार उसकी तलाश करती रही।
बाद में ललित की गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का भी घोषित कर दिया गया। छानबीन के दौरान पुलिस की टीम को पता चला कि आरोपी हिमाचल प्रदेश में कहीं से अपना सट्टा चला रहा है। वह कभी कभार ही दिल्ली आता है। देश के अलग-अलग राज्यों में वह आता-जाता रहता है। आरोपी ने अपने सट्टे के कारोबार से 100 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी भी अर्जित कर ली। जानकारी जुटाने के बाद एसीपी उमेश बर्थवाल, इंस्पेक्टर संत्येंद्र मोहन व अन्यों की टीम ने आरोपी की तलाश शुरू की। इस दौरान रविवार को टीम को सूचना मिली कि आरोपी अपने स्थायी पते उत्तम नगर पर आने वाला है। सूचना के बाद फौरन टीम को अलर्ट कर दिया गया। रात करीब 9.30 बजे आरोपी अपने घर पहुंचा तो टीम ने उसे काबू कर लिया। उसने भागने का प्रयास किया। बाद में उसे गिरफ्तार कर चाणक्यपुरी स्थित थाने लाया गया।
----
आखिरी बाद 2010 में लुधियाना में हुआ था गिरफ्तार...
दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने बताया कि सट्टे की दुनिया में कदम रखने के बाद पहली बार आरोपी लुधियान के मॉडल टाउन इलाके में गिरफ्तार किया हुआ था। वहां से जमानत मिलने के बाद आरोपी कभी उस केस के सिलसिले में नहीं गया। उसे लुधियाना की अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया। लगातार वह सट्टे का धंधा चलाता रहा। शुरुआत में वह दिल्ली में रहा, लेकिन 2015 में उसके पिता की गिरफ्तारी के बाद उसने दिल्ली छोड़ दी। ललित का पिता रोशनलाल वर्मा भी दिल्ली का बड़ा सट्टा खिलाड़ी माना जाता था। पुलिस की गिरफ्तारी के बाद रोशनलाल और अमरनाथ दोनों की मौत हो गई थी।
----
डीयू से ग्रेजुएट है आरोपी 'सट्टा किंग' ललिल वर्मा...
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ललित ने बताया कि उसका जन्म गीता कालोनी इलाके में हुआ था। उसके पिता का पुराना सट्टे का कारोबार था। पिता ने उसे पढ़ाकर इस कारोबार से दूर रखने का प्रयास किया। ऐसा हुआ भी ललित ने 12वीं के बाद डीयू से ग्रेजुएशन भी कर लिया। लेकिन वह पिता के कारोबार की ओर आकर्षित हो गया। उसने वर्ष 2006 में अपने पिता के सट्टे के कारोबार को बड़ा कर उसे देशभर में फैला दिया। यहां तक उनके सट्टे को माफिया डॉन रहे डीपी यादव ने भी सरंक्षण दिया। ललित शादीशुदा है और उसकी पत्नी व दो बच्चे हैं जो स्कूल जाते हैं। पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ कर रही है।
----
शुजात आलम