दिल्ली पुलिस के पहले पॉडकास्ट में 'थान सिंह की पाठशाला' का हुआ प्रसारण
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के पहले पॉडकास्ट में रविवार को कांस्टेबल की कहानी 'थान सिंह की पाठशाला' को ऑन एयर किया गया। कांस्टेबल थान सिंह ने झुग्गी झोपड़ी के बच्चों के लिए एक पाठशाला की शुरुआत की है।
दिल्ली पुलिस ने साप्ताहिक पॉडकास्ट सेवा की शुरुआत की है। 'किस्सा खाकी का' नाम से शुरू हुई इस पॉडकास्ट में जुर्म, इन्वेस्टिगेशन, मानवता से जुड़े दिल्ली पुलिस के अनसुने किस्सों को लोगों तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। इस प्रकार अब दिल्ली पुलिस देश में पहली ऐसी पुलिस फोर्स बन गई है, जिसका अपना पॉडकास्ट चैनल है।
मीडिया एजुकेटर और प्रिजनर रिफॉर्मर वर्तिका नंदा की आवाज में पॉडकास्ट को ऑन एयर किया गया, थान सिंह की कहानी से लोगों को पता चला कि पुलिस कितनी कठिनाई से अपनी ड्यूटी करती है और इस कठिनाई के बीच थान सिंह जैसे लोग कैसे समय निकालकर समाज को कुछ बेहतर देने का प्रयास कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच में डिप्टी कमिश्नर सुमन नलवा ने कहा कि दिल्ली पुलिस समय-समय पर कुछ नया और सर्वश्रेष्ठ करती रहती है। अब दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से समाज के साथ बातचीत करने का अनोखा तरीका अपनाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे लोगों और पुलिस के बीच मजबूत विश्वास कायम होगा। वर्तिका नंदा ने थान सिंह की नियमित ड्यूटी के विषय में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे लाल किला चौकी पर तैनात थान सिंह शाम को 5 बजे अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद घर नहीं बल्कि वहां जाते हैं जहां सैकड़ों बच्चे उनका इंतजार कर रहे होते हैं। यहां पर वह बच्चों को पढ़ाते हैं। बच्चे प्यार से इसे थान सिंह की पाठशाला कहते हैं। थान सिंह अपने माता पिता के साथ एक झुग्गी में ही रहते हैं। लेकिन वह शुरू से ही गरीब बच्चों को पढ़ा कर जीवन में कुछ अच्छा काम करना चाहते हैं। दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल की नौकरी लगने के बाद उनका सपना साकार हो गया और अब वह नियमित रूप से गरीब बच्चों को पढ़ाकर अपने जुनून को पूरा कर रहे हैं।
थान सिंह ने 2016 में चार बच्चों के साथ अपनी पाठशाला शुरू की थी, आज उनकी पाठशाला में करीब 60 बच्चे पढ़ते हैं। वह इन बच्चों को अपनी तरफ से पेन और कॉपी भी देते हैं और कोशिश करते हैं कि उनकी अधिक से अधिक जरूरतों को पूरा कर सकें।
कोविड-19 महामारी के दौरान झुग्गी के अधिकतर बच्चे अपने गांव चले गए थे, लेकिन थान सिंह ने अपनी पाठशाला को जारी रखा। दिल्ली में जो बच्चे रह गए थे, उन्हीं को वह पढ़ाते रहे। उनकी पाठशाला में अब फिर से बच्चे बढ़ गए हैं।
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आदित्य पाण्डेय