विशेष खबर: इंसानों की घटी चहलकदमी को महसूस कर रहे चिड़ियाघर के वन्यजीव
नई दिल्ली
कोरोना की बंदिशों ने वन्यजीवों के व्यवहार पर असर डाला है। इसे साफ-साफ दिल्ली के चिड़ियाघर में देखा भी जा सकता है। पर्यटकों की चहलकदमी बंद होने से कई वन्यजीवों के व्यवहार में इस वक्त सुस्ती दिख रही है। इसमें अफ्रीकन हाथी, भालू, सिंह और बंदर जैसे वन्यजीव शामिल हैं। दिलचस्प यह कि जू प्रशासन के कर्मचारियों व अधिकारियों के इन वन्यजीवों के बाड़ों में पहुंचते ही अजीब सी हलचल नजर आती है। वन्य जीवों की आंखों में चमक आ जाती है। जबकि इनके लौट जाने पर फिर से मायूस हो जाते हैं।
चिड़ियाघर के निदेशक रमेश कुमार पांडे के मुताबिक, यह पहली दफा है जब देशभर के चिड़ियाघर इतने लंबे समय तक के लिए बंद रहे हैं। यही वजह है कि इससे वन्यजीवों के व्यवहार में भी परिवर्तन देखने को मिला है। इसमें खासतौर पर अफ्रीकन हाथी, भालू, बंदर और सिंह शामिल है। पांडे ने बताया कि चिड़ियाघर में शुरू से ही यह जानवर लोगों की मौजूदगी में रहे हैं। लेकिन बीते छह महीने से इन्हें अब पहले की तरह शोर और पर्यटकों की और से आने वाली आवाज नहीं सुनाई देती है। यही वजह है कि जब भी चिड़ियाघर प्रशासन के कर्मचारी इन वन्यजीवों के बाड़े में पहुंचते हैं तो इनके आंखों में एक अलग चमक देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि शुरू से ही यह वन्यजीव लोगों के बीच में अपनी उपस्थिति को दर्ज कराते हुए आए हैं, लेकिन अब लोगों की चहलकदमी न होने से बाड़ों में रह रहे वन्यजीव भी खुद को अकेला महसूस करते हैं। इसमें प्रमुख रूप से अफ्रीकन हाथी और सिंह की प्रतिक्रिया अधिक देखने को मिलती है।
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व्यावहारिक रूप से मिलनसार होते हैं वन्यजीव
विशेषज्ञों के अनुसार, चिड़ियाघर में पर्यटकों की चहल कदमी को महसूस करने के पीछे यह भी कारण है कि शुरू से ही हाथी, बंदर व भालू मिलनसार भाव के रहे हैं। यही वजह है कि अक्सर हाथी, बंदर और भालू को पाला भी जाता है। जिस प्रकार मनुष्य में संवेदनाएं होती हैं इसी प्रकार इन वन्यजीवों में भी मनुष्य के प्रति संवेदनाएं होती हैं। यही वजह है कि प्रमुख रूप से हाथी का भी इंसानों के प्रति अधिक लगाव देखा जाता है। चिड़ियाघर के निदेशक रमेश कुमार पांडे के मुताबिक शुरू से ही वन्यजीव बाड़ों में इंसानों के मौजूदगी में रहे हैं। इन वन्यजीवों का जन्म भी यही हुआ है ऐसे में इन्हें लोगों की मौजूदगी की भी आदत है। हालांकि, अब पहले के मुकाबले चहल-पहल कम हो गई है इस वजह से यह वन्यजीव इस कमी को महसूस भी करते हैं। वहीं, पर्यटकों को देखकर उछल कूद करने वाले बंदर भी सुस्त हैं। जो कभी अपनी गतिविधियों से पर्यटकों का मनोरंजन करते थे।
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लंबे समय तक सेहत पर पड़ेगा असर
चिड़ियाघर के निदेशक रमेश पांडे के मुताबिक, जिस प्रकार कोरोना और लॉकडाउन की वजह से वन्यजीवों को पहले के मुकाबले शांति मिली है। इससे निश्चित तौर पर ही वन्यजीवो को स्वास्थ्य संबंध में भविष्य में लंबे समय तक अच्छा प्रभाव देखने को मिलेगा। हालांकि, इसे लेकर अभी कोई अध्ययन नहीं किया गया है, लेकिन यदि अनुभव की बात करें तो हम इसका अनुमान लगा सकते हैं। क्योंकि, प्राकृतिक माहौल का इंसान के साथ साथ वन्यजीवों पर भी प्रभाव पड़ता है। खासतौर पर यह उनके शारीरिक और मानसिक विकास को भी प्रभावित करता है।
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लॉकडाउन की वजह से राजधानी में लौट आई थी लुप्त प्राय पक्षियों की प्रजातियां
पक्षी विशेषज्ञ निखिल दिवासर के मुताबिक, राजधानी में लॉकडाउन की वजह से कुछ लुप्तप्राय पक्षियों की प्रजाति भी देखने को मिली थी। हालांकि, अब अनलॉक की कड़ी में फिर से वही हालात हो चुके हैं, लेकिन पहले के मुकाबले राजधानी में पक्षियों ने हमारे आंगन से लेकर आसपास के पार्कों में भी अपने लिए जगह बनाई है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के समय राजधानी में ब्लैक बेलिड टर्न, इंडियन स्कीमर और शाहीन फाल्कन पक्षी शामिल है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा राजधानी के कुछ वेटलैंड इलाकों में भी पक्षियों की संख्या बढ़ी है। इसमें नजफगढ़ वेटलैंड व सुल्तानपुर के आसपास के इलाके भी शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, राजधानी में वर्तमान में 350 के करीब पक्षियों की प्रजातियां मौजूद हैं।
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कोरोना और लॉकडाउन की वजह से वन्यजीवों का बढ़ गया था दायरा
लॉकडाउन में दिल्ली एनसीआर की सड़कों पर वन्यजीवों को देखे जाने के भी कई मामले सामने आए थे। इस संबंध में वाइल्डलाइफ एसओएस के सह संस्थापक कार्तिक नारायण ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि कोरोना की वजह से वन्यजीवों के जीवन पर प्रभाव पड़ा था। कोरोना और लॉकडाउन की वजह से सुनसान हुई दिल्ली -एनसीआर की सड़कों पर वन्यजीवों को देखे जाना आम बात थी। उन्होंने कहा कि महामारी की वजह से इन वन्यजीवों को अपना प्राकृतिक माहौल में रहने का मौका मिला था। यही वजह थी कि जो जगह कभी वन्यजीवों के रहने के लिए हुआ करती थी। उस पर समय के साथ- साथ मनुष्य ने कब्जा कर लिया था, लेकिन लॉकडाउन और कोरोना की वजह से शांति होने के कारण वन्यजीव एक बार फिर अपने अपने क्षेत्र से निकलकर खुले में लौट आए थे। लेकिन, अब फिर से वही हालत पनप रहे हैं जिससे इन वन्यजीवों के मानसिक और शारीरिक विकास पर भी प्रभाव पड़ रहा है। विशेषज्ञ ने कहा कि वन्यजीवों के संरक्षण और उनके विकास के लिए मनुष्यों के बीच में जागरूकता जरूरी है।
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(किशन कुमार)