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दिल के मरीजों के लिए घातक साबित हो रहा कोरोना

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दिल के मरीजों के लिए घातक साबित हो रहा कोरोना अभिषेक पांचाल  नई दिल्ली। कोरोना महामारी में दिल के रोगियों के लिए संक्रमण घातक साबित हो रहा है। जहां देश में हर साल लाखों मरीजों की मौत दिल की बीमारियों से हो रही हैं। वहीं कोरोना संक्रमण की वजह से भी दिल के मरीजों की तकलीफ बढ़ी है। डॉक्टरों की मानें तो पहले से दिल की परेशानियों से जूझ रहे मरीजों में संक्रमण ज्यादा हो रहा है। वहीं कुछ मामले ऐसे भी हैं जिन्हें संक्रमण होने के बाद दिल से जुड़ी परेशानी हो रही है।  राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के डॉ. अजीत जैन का कहना है कि आमतौर पर लोग समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल जांच नहीं कराते हैं। इसके कारण उन्हें पता नहीं चल पाता। दो या तीन मंजिल पर चढ़ने के दौरान लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। इसके चलते 60 फीसदी लोगों को दिल का दौरा पड़ने के बाद पता चलता है कि उन्हें दिल से जुड़ी हुई बीमारियां हैं। साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. रजनीश मल्होत्रा का कहना है कि इस समय दिल की बीमारियों से पीड़ित लोगों को खास ख्याल रखने की जरूरत है ऐसे कई मामले आए हैं जहां इन मरीजों की जान बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी है। वहीं डॉ. विवेका कुमार ने बताया कि कोरोना की वजह से मरीजों में अवसाद और तनाव जैसे लक्षण भी देखने को मिल रहे हैं। अगर वह मरीज पहले से ही दिल की बीमारी से ग्रस्त है तो ऐसे में इन्हें और भी ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। ------- अनलॉक में हार्ट प्रोसीजर भी बढ़े डॉक्टरों के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान हार्ट अटैक के मामलों में कमी आई थी, लेकिन अब अनलॉक की स्थिति में यह मामले फिर से बढ़े हैं। बीते कुछ महीनों में ही स्टेंट, पेसमेकर और हार्ट ऑपरेशन बढ़ने लगे हैं। कालरा अस्पताल के निदेशक डॉ. आरएन कालरा का कहना है कि दिल की धमनियों में रक्त के थक्के जमने के मामले तेजी से आ रहे हैं। इसी का परिणाम है कि एंजियोप्लॉस्टि व एंजियोग्राफी भी बढ़ने लगी हैं। वहीं जीबी पंत और सफदरजंग अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार यहां 10 कोरोना मरीजों को पेस मेकर लगाया जा चुका है।  -------- दौरा पड़ने का अधिक है खतरा दिल्ली एम्स के डॉ. राकेश यादव ने बताया कि कोरोना पीड़ित मरीजों में दिल का दौरा पड़ने का अधिक खतरा होता है। कोरोना संक्रमित मरीज की रक्तवाहिनियों में खून के थक्के भी बन जाते हैं।  जिसकी वजह से दिल का दौरा पड़ने खतरा भी बढ़ जाता है। ---- कोविड मरीजों में रोक रहे थक्का हिंदूराव अस्पताल की डॉ अंकिता सिंह का कहना है कि आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की जांच में डी डायमर स्तर का पता लगाते हैं। ताकि रक्त के थक्के का पता चल सके। मरीजों को रिवारोक्साबेन व एपिक्साबेन सॉल्ट की दवाएं लगातार दी जा रही हैं, ताकि खून शरीर में खून का थक्का न हो। -- ये आए हैं मामले जीबी पंत और सफदरजंग में दस कोरोना मरीजों को पेस मेकर लगाना पड़ा जीबी पंत  सफदरजंग अस्पताल में दिल की बीमारी के इलाज के लिए दस ऐसे मरीजों पर अध्ययन किया गया। जिनको कोरोना संक्रमण हो गया था।  इन मरीजों में ह्रदय गति घटकर 30 से 42 बीपीएम प्रति मिनट रह गयी थी।  इनमें पांच मरीजों को स्थायी पेसमेकर लगाया जा चुका है। दो अन्य रोगियों की हृदय गति में अस्थायी पेसिंग और इलाज में सुधार हुआ है।डॉक्टरों का कहना है कि , इस तरह के मामले साफ दर्शा रहे है कि अब कोरोना दिल से जुड़ी समस्याओं को भी पैदा करता और बढ़ाता है। --- ह्रदय की बीमारियों के बढ़ने का कारण •जीवन में तनाव •खाने की ग़लत आदत •कम्प्यूटर/ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर देर तक काम करना •स्मोकिंग, तंबाकू, शराब की लत •पर्यावरण का प्रदूषण -- लक्षण डॉक्टरों की मानें तो हार्ट अटैक का सबसे बड़ा लक्षण माना जाता है- सीने में तेज़ दर्द।जब दिल तक खून की आपूर्ति नहीं हो पाती तो दिल का दौरा पड़ता है.।आमतौर पर हमारी धमनियों के रास्ते में किसी तरह की रुकावट आने की वजह से खून दिल तक नहीं पहुँच पाता, इसीलिए सीने में तेज़ दर्द होता है. लेकिन कभी-कभी दिल के दौरे में दर्द नहीं होता. इसे साइलेंट हार्ट अटैक कहा जाता । --  आंकड़े 1. देश में हर साल 17 लाख लोगों की मौत दिल से जुड़ी बीमारियों से होती है। 2. देश की राजधानी दिल्ली में 40 फ़ीसदी लोग विभिन्न प्रकार की दिल की बीमारियों से ग्रस्त हैं 3. 60 फीसदी लोगों को दिल का दौरा पड़ने के बाद मालूम चलता है कि उन्हें  ह्रदय रोग से जुड़ी समस्याएं हैं 4. दिल्ली में कोरोना संक्रमित 10 दिल के मरीजों जान बचाने के लिए पेसमेकर लगाना पड़ा --  अभिषेक पांचाल
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