नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने हैदराबाद के निजाम के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ने वाले प्रतापपाणी मुथैया को स्वतंत्रता सेनानी पेंशन देने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि सभी दस्तावेजों से स्पष्ट है कि वह ब्रिटिश राज के समर्थन वाले हैदराबाद निमाज के खिलाफ हुए संग्राम में शामिल था और वह स्वतंत्रता सेनानी पेंशन पाने का पूर्ण रूप से हकदार है। न्यायमूर्ति वाल्मीकि जे मेहता ने अपने फैसले में याची प्रतापपाणी मुथैया के तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि वह याचिका दायर करने से अब तक मिलने वाली पेंशन राशि पर छह प्रतिशत ब्याज पाने का भी हकदार है। अदालत ने इस फैसले की प्रति आंध्रप्रदेश स्थित संबंधित जज के पास भेजने का निर्देश दिया है, ताकि याची को पेंशन दी जा सके। अदालत ने हाईकोर्ट द्वारा 2 नवंबर 2012 को सुखई ठाकुर बनाम केंद्र सरकार मामले का हवाला देते हुए कहा कि स्पष्ट है कि स्वतंत्रता सेनानी पेंशन प्रदान करने के लिए गठित हैदराबाद स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष याची ने आवेदन दायर करते समय सभी नियम और शर्तों को पूरा किया था। इतना ही नहीं, कमेटी ने भी उसे पेंशन पाने के लिए योग्य माना था। ऐसे में उसे पेंशन पाने का पूरा अधिकार है। याची ने तर्क रखा था कि हैदराबाद का निजाम, ब्रिटिश राज के समर्थन से राज कर रहा था और उनके खिलाफ हुए स्वतंत्रता संग्राम में वह भी शामिल हुआ। उसने 19 नवंबर 1987 में स्वतंत्रता सेनानी पेंशन स्कीम के तहत आवेदन किया, लेकिन उसे पेंशन नहीं दी गई। केंद्र सरकार ने अपने जवाब में माना कि याची को हैदराबाद स्पेशल स्क्रीनिंग कमेटी ने पेंशन देेने का निर्देश दिया था, लेकिन आंध्रप्रदेश सरकार की याचिका पर वहां की हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश दे दिया था।