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‘हैलो, मैं पहले वाली जगह मिलूंगा’

Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
New Delhi
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मुजफ्फरनगर। माफिया सरगना सुशील मूंछ तक पहुंचने के लिए एसटीएफ को तीन माह तक होमवर्क करना पड़ा। उसके फोन सर्विलांस पर लगाए गए, लेकिन कोडवर्ड में बात करने की वजह से उसका पता नहीं लग पा रहा था। काफी मशक्कत के बाद एसटीएफ ने एक व्यक्ति को खोज निकाला जो मूंछ के संपर्क में था। उस व्यक्ति ने मूंछ से मिलने के लिए फोन किया, जिसमें मूंछ ने जवाब दिया कि पहली वाली जगह पर आ जाना। बस इसी एक चूक ने मूंछ को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। एसटीएफ के एसपी अनंत देव ने शुक्रवार को इस सिलसिले में कई अहम जानकारियां दीं। उनका कहना है कि अगर मूंछ अब नहीं पकड़ा जाता तो फिर उसका फंदे में फंसना मुश्किल हो जाता। वह इसलिए कि वह जल्द किसी दूसरे शहर में अपना ठिकाना बदलने की तैयारी में था। मूंछ मोबाइल पर कम लैंडलाइन पर ज्यादा बात किया करता था। वह अपने ठिकाने पर कभी किसी को नहीं ले गया। आसपास के लोग उसे बिजनेसमैन के रूप में जानते थे। यहां तक कि उसके साथी बदन सिंह बद्दो और भूपेंद्र बाफर भी उसके ठिकाने से अनजान थे। इनसे पूछताछ में इतना साफ हुआ कि उनकी मूंछ से जो भी मुलाकात हुई, करनाल या दिल्ली में हुई। सर्विलांस की मदद से एसटीएफ ने मुजफ्फरनगर के उस शख्स को खोज निकाला जो मूंछ से लगातार बात करता था। खास बात ये थी कि जिस सिम से वह बात करता था, उस पर मूंछ के नंबर से अलावा किसी से बात नहीं हुई। प्रॉपर्टी के धंधे से जुड़े इस शख्स ने मूंछ को कॉल कर पूछा कि उसे मिलना है, कहां मिलोगे? इस पर मूंछ का जवाब था कि ‘पहली वाली जगह पर’। यानी मूंछ ने उस जगह का नाम नहीं लिया जहां मिलना था। मूंछ इस बात से अनजान था कि उसके मिलने के कई ठिकानों का राज एसटीएफ जान चुकी है। बस, माफिया सरगना यहीं गच्चा खा गया और एसटीएफ के शिकंजे में फंस गया।
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