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16 साल बाद कारोबारी को मिलेगा भुगतान

Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
New Delhi
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नई दिल्ली। कारोबारी अभय जैन और सरकार के बीच कई वर्षों से चल रही कानूनी जंग पर विराम लग गया है। अतिरिक्त जिला जज अजय गोयल की अदालत ने कारोबारी को 2 लाख 88 हजार रुपये भुगतान का आदेश एमसीडी व दिल्ली जल बोर्ड को दिया है। अभय की कंपनी जैनको इंडस्ट्री ने वर्ष 1996 में इन सरकारी एजेंसियों को बांस व मेनहोल के ढक्कन सप्लाई किए थे। अदालत ने एमसीडी व जल बोर्ड पर 25 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है। इस राशि की कटौती उन अधिकारियों के वेतन से होगी, जिनके कारण वादी को भुगतान करने में देरी हुई। अदालत ने जल बोर्ड के चेयरमैन से एक माह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। बता दें कि वर्ष 1996 में एमसीडी ने समाचार पत्र में विज्ञापन देकर बांस व मेनहोल के ढक्कन सप्लाई करने के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं। अभय को इस सामान की सप्लाई का ठेका मिला था। माल की सप्लाई के दौरान 89,700 व 84000 रुपये के दो बिल बने। इसके भुगतान के लिए कई बार नोटिस देने के बाद भी अभय को पैसा नहीं मिला। वर्ष 1999 में उसने एमसीडी के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। इस बीच दिल्ली जल बोर्ड वर्ष 1998 में एमसीडी से अलग हो गया था। अदालत ने जनवरी 2001 में 2 लाख 88 हजार रुपये व ब्याज का भुगतान जैन को करने का आदेश जल बोर्ड को दिया था, लेकिन इस आदेश के खिलाफ जल बोर्ड ने अपील की थी। जल बोर्ड ने इस राशि के भुगतान के लिए एमसीडी को जिम्मेदार बताया था। मामले का निपटारा करते हुए एडीजे अजय गोयल ने सरकारी वकील की कड़ी आलोचना की। उसने वर्ष 2001 में जल बोर्ड को इस राशि का भुगतान न करने की सलाह दी थी। अदालत ने कहा कि यह देश में फैली लाल फीताशाही का बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। जिस शख्स ने सरकारी एजेंसियों के साथ संविदा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी की, उस व्यक्ति को अपनी राशि के भुगतान के लिए सरकार से लड़ना पड़ा।
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