दिल्ली और नोएडा में बुधवार से सभी प्राइमरी स्कूल खोलने का फैसला किया गया है। वहीं, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के चौथे चरण में लगाए प्रतिबंध हटा लिए गए हैं। दिल्ली-एनसीआर की हवा में सोमवार को सुधार दिखा। हालांकि, लगातार चौथे दिन यह बेहद खराब की स्थिति में बनी रही। दिल्ली में सोमवार को औसत एक्यूआई 343 रहा।
दिल्ली की सीमा में अब ट्रकों का प्रवेश संभव होगा। सरकार ने 50 फीसदी कर्मचारियों को घर से काम करने का निर्देश वापस ले लिया है। इसके अलावा निजी निर्माण को छोड़ दूसरी निर्माण गतिविधियां चालू हो जाएंगी। हालांकि, अब भी दिल्ली में बीएस-3 पेट्रोल व बीएस-4 डीजल वाहनों के सड़कों पर उतरने की इजाजत नहीं होगी।
40.25 हजार से अधिक प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी
दिल्ली में इस साल अब तक 40 लाख, 25 हजार, 946 वाहनों को वैध नियंत्रित प्रदूषण प्रमाण पत्र(पीयूसीसी) जारी किए। प्रदूषण स्तर के गंभीर होने पर परिवहन विभाग की तरफ से नोटिस भी भेजे गए थे। बगैर पीयूसीसी चलने वाले वाहनों पर जुर्माना किया जा रहा है।
पिछले साल 60 लाख, 36 हजार, 207 वाहनों के लिए पीयूसीसी जारी किए गए थे। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक साल भर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर विभागीय टीमें कार्रवाई करती हैं। करीब 10 महीने में लाखों की संख्या में पीयूसीसी जारी होने के बावजूद अभी भी सड़कों पर कई वाहन बगैर पीयूसीसी चल रहे हैं। नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। साल के 10 महीने में 8444 वाहनों की मियाद (10 साल पुराना डीजल और 15 साल पुराना पेट्रोल)खत्म होने पर उन्हें जब्त किया गया।
पांच लाख से अधिक वाहनों पर पाबंदी
दिल्ली में फिलहाल बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाहनों के चलने पर अभी भी पाबंदी है। हालांकि आदेश में कहा गया है कि आवश्यक कार्यों के सिलसिले में जाने वाले वाहनों, सरकारी और चुनाव ड्यूटी में आवागमन करने वाले वाहनों को इसमें छूट दी गई है। ग्रैप-3 के तहत बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल कारों पर पाबंदी से दिल्ली में पांच लाख से अधिक वाहनों के पहिये थम जाएंगे। अगर, इन्हें सड़कों पर उतारा जाता है तो उनपर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दिल्ली में 207038 बीएस-3 पेट्रोल जबकि 309225 बीएस-4 डीजल वाहन हैं।