तिमारपुर झील तैयार होने के बाद पर्यटकों के लिए बनेगा आकर्षण का केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। केजरीवाल सरकार दिल्ली को झीलों का शहर बनाने के विजन को साकार कर रही है। इस दिशा में सरकार पर्यटन स्थल के रूप में तिमारपुर झील परिसर को विकसित कर रही है। इसके तैयार होने के बाद लोग यहां प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे। इस परियोजना से जहां ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने में मदद मिलेगी, वहीं इलाके के लोगों को पानी की समस्या से भी निजात मिलेगी। जल मंत्री आतिशी ने बृहस्पतिवार को तिमारपुर झील का निरीक्षण करने के बाद उसकी परियोजना व सरकार की मंशा के बारे में बताया।
आतिशी ने बताया कि तिमारपुर में 1940 के आसपास ट्रीटमेंट प्लांट हुआ करते थे। इन ऑक्सिडेशन पॉन्ड को गंदा पानी साफ करने के लिए प्रयोग किया जाता था। गंदे पानी को साफ करने का ये तरीका बहुत पुराना था, जिस कारण तिमारपुर की जमीन पर गंदा पानी जमा हो जाता था और बेहद बदबू भी आती थी। इसी वजह से यह प्लांट बंद किया गया। इसके बाद पिछले कई सालों से लोगों ने साइट पर कूड़ा डालना शुरू कर दिया। गंदगी के कारण आसपास के लोग यहां आना तक पसंद नहीं करते थे। इस समस्या पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने इस जमीन पर झील विकसित करने का प्लान तैयार किया और अब ये जगह शानदार झील में तब्दील हो चुकी है। उन्होंने बताया कि तिमारपुर में झील परिसर के निर्माण के अलावा पांच एकड़ में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के दूसरे चरण के तहत तिमारपुर झील परिसर में यह एसटीपी बनाया जा रहा है। इस प्लांट में हर रोज 25 एमएलडी पानी का शोधन किया जाएगा। इस प्लांट के शोधित पानी का इस्तेमाल झील को भरने और ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने में किया जाएगा। तिमारपुर झील से रोजाना कई करोड़ लीटर पानी रीचार्ज होने की संभावना है। तिमारपुर झील को 40 एकड़ जमीन पर विकसित किया जा रहा है। झील बनाने की परियोजना अपने अंतिम चरण में है। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण का 90 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है। ग्रैप की पाबंदियों के कारण अभी निर्माण कार्य बंद है। पाबंदियां खत्म होने के बाद बाकी काम भी जल्द पूरा हो जाएगा।