शाहीन बाग पुलिस ने 500 लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर सरगना युवती व उसके तीन साथियों को 13 और 14 मार्च को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान सरगना कोमल उर्फ काजल, रिजवान, अंकुर और हसरत के रूप में हुई। दरअसल, आरोपी एटीएम के कीबोर्ड पर ग्लू डालकर बटन खराब कर देते थे।
पीड़ित जब कार्ड एटीएम में डालता तो कीबोर्ड काम नहीं करने के कारण पैसे नहीं निकलते थे। उसी समय गिरोह के दो लोग सहायता करने के बहाने बूथ में घुसकर पीड़ित से कार्ड फिर मशीन में डलवाते थे। इस दौरान ये पिन नंबर देख लेते थे। इसके बाद किसी तरह से पीड़ित का एटीएम कार्ड बदल देते थे। फिर ये दूसरे एटीएम से पैसे निकाल लेते थे। गिरोह के बदमाश यूपी, दिल्ली व हरियाणा समेत पूरे देश में ठगी करते थे। शाहीन बाग पुलिस के पास 24 से ज्यादा पीड़ित सामने चुके हैं।
दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अबुल फजल एन्क्लेव निवासी कोशेर फारूक्की ने 10 मार्च को शाहीन बाग पुलिस को सूचना दी थी कि उसका भाई एटीएम से पैसे निकालने गया था। वहां दो लड़के मिले और इन लोगों ने मदद के बहाने उसके भाई का डेबिट कार्ड एटीएम में स्वैप किया था। कुछ देर बाद उसके खाते से 20 हजार रुपये निकल गए।
चार महीने से एटीएम बूथ में डेबिट कार्ड बदलने की शिकायतें भी मिल रही थीं। मामला दर्ज कर शाहीन बाग थानाध्यक्ष देविंद्र सिंह की देखरेख में पुलिस टीम ने जांच शुरू की। टीम ने एटीएम बूथ में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। बूथ के पास एक स्कूटी व कार घूमती नजर आई। पुलिस टीम ने स्कूटी के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर सराय काले खां निवासी रिजवान को 13 मार्च को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने गुनाह कबूल कर लिया।
पूछताछ के बाद उसके दो साथियों गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी निवासी अंकुर और गाजियाबाद के मेहराजपुर निवासी हसरत को गिरफ्तार कर लिया। इनसे पूछताछ के बाद गिरोह की सरगना कोमल उर्फ काजल को उसके नंदनगरी स्थित किराये के मकान से 14 मार्च को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से आठ डेबिट कार्ड, एक महंगी कार व दो स्कूटी बरामद की गई हैं।
2017 से ठगी कर रहा था गिरोह
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी वर्ष 2017 से ठगी कर रहे थे। ये वर्ष 2017 में मोदी नगर व कौशांबी में गिरफ्तार हुए थे। जमानत पर बाहर आने के बाद फिर ठगी करने लगे। 12वीं पास कोमल के पिता टैक्सी ड्राइवर हैं। शुरू में इसने बुटीक का काम शुरू किया। यहां पर इसकी मुलाकात गाजियाबाद निवासी अरुण से हुई। अरुण ने उसे कार्ड स्वैपिंग की तकनीक बताई। इसके बाद इसने गिरोह बनाकर शुरू में कई बैंकों के 10 डेबिट कार्ड की व्यवस्था की। इसके बाद वह प्रेमी अरुण के साथ रहने लगी।
ठगी की रकम से कार खरीदी
कोमल ने शुरू में ठगी की रकम से कार खरीदी थी और कार से ठगी करने जाती थी, ताकि किसी को उसकी गतिविधियों पर संदेह न हो। कोमल सिर्फ ब्रांडेड कपड़े पहनती थी। आरोपी शराब पीने की शौकीन है। मूलरूप से हापुड़ निवासी रिजवान ने शुरू में ओला-उबर टैक्सी चलाना शुरू किया। ज्यादा कमाई नहीं होने के कारण वह अरुण से मिला और उसने उसे ठगी के तरीके बताए। बाद में उसे हसरत से मिलवाया। अरुण ने ही हसरत को ठगी के तरीके बताए। अरुण शुरू में जिम ट्रेनर था। उसकी मुलाकात अबास से हुई जिसने उसे रिजवान से मिलवाया था। लॉकडाउन में जब जिम बंद हो गया तो आरोपी अरुण भी ठगी करने लगा।