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Delhi: चालक के लाइसेंस का सही सत्यापन नहीं करने पर डीटीसी बराबर जिम्मेदार

Sat, 01 Oct 2022 05:11 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

अदालत ने कहा पेश मामले में स्पष्ट है कि डीटीसी बस का चालक बस को तेज गति और लापरवाही से गाड़ी चला रहा था और उसकी लापरवाही से साइकिल सवार की मौत हुई।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हाई कोर्ट ने करीब 11 वर्ष पूर्व डीटीसी बस से दुर्घटना में साइकिल सवार की मौत मामले में 20 लाख रुपये के मुआवजे के खिलाफ दायर डीटीसी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत के मुआवजा संबंधी फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि दस्तावेजों से साबित होता है कि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था और दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी याची डीटीसी प्रशासन की है। ऐसे में दुर्घटना के लिए वह बराबर का जिम्मेदार है।

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17 फरवरी 2011 में साकेत में प्रेस एन्क्लेव के पास एक सड़क हादसे में साइकिल सवार अवधेश शर्मा की मौत हो गई थी। न्यायमूर्ति गौरंग कंठ ने अपने फैसले में कहा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट मुहैया कराना डीटीसी की जिम्मेदारी है, लेकिन ड्राइवर को नौकरी के लिए प्रदान दस्तावेज का सत्यापन करना भी उसकी जिम्मेदारी है और ऐसा न कर उसने निर्दोष जनता के जीवन को दांव पर लगाया है। 

अदालत ने कहा कि वह उन यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रही, जो इस विश्वास के साथ उसकी बसों में चढ़ते हैं कि इन ड्राइवरों के पास निश्चित रूप से वैध लाइसेंस होगा और वह दिल्ली की सड़कों पर गाड़ी चलाने के लिए जरूरी ट्रेनिंग और काबिलियत रखते होंगे। 
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अदालत ने कहा पेश मामले में स्पष्ट है कि डीटीसी बस का चालक बस को तेज गति और लापरवाही से गाड़ी चला रहा था और उसकी लापरवाही से साइकिल सवार की मौत हुई। साकेत के मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने हादसे के लिए डीटीसी और उसके जिम्मेदार माना और मृतक के परिजनों को करीब 20 लाख रुपये का मुआवजा ब्याज के साथ दिए जाने का फैसला सुनाया था।

अनाथालय में दो दिन 100 बच्चों को भोजन परोसने का निर्देश
उच्च न्यायालय ने 13 सितंबर को हरि नगर इलाके में बाइक को टक्कर मारने वाले कार चालक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को सशर्त रद्द करते हुए आरोपी को एक अनाथालय में स्वच्छ और अच्छी तरह से पका हुआ भोजन परोसकर सामाजिक सेवा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि भोजन कम से कम 100 बच्चों को 5 अक्तूबर और 24 अक्तूबर को प्रदान किया जाए। 

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने हिरासत में लिए गए आरोपी को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया और छह सप्ताह की अवधि के भीतर उससे और साथ ही जांच अधिकारी से अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने 13 सितंबर 2022 को हरि नगर पुलिस स्टेशन में धारा 308 के तहत गैर-इरादतन हत्या के प्रयास के आरोप में दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया। 

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसकी बाइक को आरोपी ने अपनी कार से टक्कर मार दी, जिसके परिणामस्वरूप उसका भाई जो बाइक पर था, बेहोश हो गया और उसे अस्पताल ले जाया गया। मेडिको लीगल रिपोर्ट से पता चला है कि चोटें साधारण थीं। इसके बाद शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों में समझौता हो गया।

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