प्रो. मणिवण्णन ने बताया कि पिछले दिनों आईआईटी मद्रास के सर्वे में सामने आया था कि बायोमेडिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र भारत में सबसे अधिक अनदेखी का शिकार है। इस श्वेत पत्र के माध्यम से हम उम्मीद करते हैं कि देश में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार बढ़ावा देगी।
श्वेत पत्र के सुझाव
- बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाएंगे, जबकि डॉक्टर और उद्यमी इंजीनियरिंग कॉलेजों में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के छात्रों को पढ़ाएंगे।
- मेडिकल उपकरण तैयार करने और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की संबद्धता के लिए बायोमेडिकल इंजीनियरिंग कॉलेज और मेडिकल कॉलेज मिलकर काम करेंगे।
- नेशनल बीएमई (बायोमेडिकल इंजीनियरिंग) डेवलपमेंट कमेटी बनाएं। इसमें मेडिकल डिवाइस जगत के प्रतिनिधि शामिल हों।
- भारत में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा आउटकम आधारित पद्धति पर करवाई जाए।
- मेडिकल उपकरणों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए डिफेंस कॉरिडोर की तर्ज पर मेडिकल डिवाइस कॉरिडोर बनाए जाएं।
- बायोमेडिकल इंजीनियरिंग डिग्रीधारकों को अस्पतालों में नौकरी से पहले ग्रेजुएट एपटीट्यूड टेस्ट (बीएमई) को पास करना अनिवार्य होगा। अस्पतालों को ऐसे छात्रों को इंटर्नशिप भी देनी होगी।
- जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया के आधार पर आयुष के लिए बीएमई का विकास किया जाए। योगा इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी जैसे विशेष कार्यक्रम शुरू किए जाएं।
श्वेत पत्र के माध्यम से भारत में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की दिक्कतों और चुनौतियों की जानकारी मिली है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर दिक्कतों और समस्याओं को दूर करने के लिए भविष्य में सकारात्मकता के साथ विचार किया जाएगा। उम्मीद है कि इस पहल से बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के छात्रों को स्वास्थ्य क्षेत्र के बारे में गहराई से समझने में मदद मिलेगी। इससे भारत समेत दुनिया के तमाम देशों को हेल्थ केयर सेक्टर में बड़ी राहत मिल सकेगी। इससे नवजात और बच्चों के इलाज में बड़ी राहत मिल सकती है।
-डॉ. विनोद के. पॉल, सदस्य, नीति आयोग।
देश में नवोन्मेष की अपार संभावना
बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र की चुनौतियों को समझने और उसे लागू करने के लिए प्रो. मणिवण्णन और उनकी टीम को बधाई देता हूं। भारत में स्वास्थ्य व उपचार क्षेत्र में किफायती नवोन्मेष की प्रचुर संभावनाएं हैं जो देश को विश्वस्तर पर लीडर बना सकता है।
-प्रो. भास्कर राममूर्ति, निदेशक, आईआईटी मद्रास।