अकेलापन लोगों में मानसिक रोग बढ़ा रहा है। कोरोना महामारी के बाद मानसिक रोग में इजाफा देखा गया है। ऐसे में डॉक्टरों की मांग है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी मनोचिकित्सक की व्यवस्था की जानी चाहिए। जिससे रोगी की पहचान प्रारंभिक अवस्था में हो सके। इससे रोगी का उपचार कम समय में आसानी से हो सकेगा।
दिल्ली नगर निगम के आयुर्वेदिक पंचकर्मा अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक व मनोचिकित्सक डॉ. आरपी पाराशर ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात चिकित्सकों को मानसिक स्वास्थ्य का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। साथ ही आयुष चिकित्सकों को भी इसमें शामिल करना चाहिए। मानसिक रोगों के उपचार के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। इसका दायरा अस्पताल और दवा की सोच से बड़ा होना चाहिए। योग, ध्यान, आध्यात्मिकता और प्राणायाम का मानसिक रोगों के उपचार में विशेष महत्व है।
कोरोना महामारी के बाद बढ़े रोगी
डॉ. पराशर ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद मानसिक रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। देश की करीब 10 फीसदी जनसंख्या किसी न किसी मानसिक समस्या से पीड़ित है। स्टैटिसटिकल रिसर्च डिपार्टमेंट के अनुसार इस समय भारत में करीब 20 करोड़ लोग किसी न किसी मानसिक रोग से ग्रस्त हैं जिनमें से लगभग 6 करोड़ डिप्रेशन और 4 करोड़ एंजाइटी से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वर्ष का थीम रखा है। सबके लिए मानसिक स्वास्थ्य को वैश्विक प्राथमिकता बनाएं। यह तभी संभव होगा जब आयुष पद्धतियों को मानसिक रोगों की चिकित्सा के लिए प्रयोग किया जाए।