वामपंथी छात्रों ने देखी प्रतिबंधित सीरीज
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दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) कैंपस में प्रशासन की रोक के बाद भी मंगलवार देर शाम छात्रों के एक गुट ने मोबाइल पर सरकार की ओर से प्रतिबंधित ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’की स्क्रीनिंग देखी। कैंपस के लॉन में छात्रों के एक गुट ने मोबाइल पर एक-दूसरे को उक्त सीरीज साझा की। जेएनयू प्रशासन के नोटिस पर इन छात्रों ने जवाब में लिखा है कि वे जानना चाहते हैं कि आखिर इस सीरीज में ऐसा क्या था? जिसके कारण सरकार को इसे प्रतिबंधित करना पड़ा।
जेएनयू कैंपस में सरकार द्वारा प्रतिबंधित ''इंडिया: द मोदी क्वेश्चन की स्क्रीनिंग के नाम पर छात्र और विश्वविद्यालय प्रशासन आमने-सामने है। जेएनयू प्रशासन ने सोमवार शाम छात्रों के नाम नोटिस जारी करके प्रतिबंधित फिल्म की स्क्रीनिंग देखने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके बाद छात्रों ने मंगलवार शाम को विश्वविद्यालय प्रशासन के नोटिस पर जवाब भेजा है। इसमें छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से तीन सवाल पूछे हैं। पहला, विश्वविद्यालय प्रशासन बताए कि जेएनयू एक्ट में कहां लिखा है कि यदि किसी फिल्म की स्क्रीनिंग होती तो यह नियमों की अवहेलना है?। दूसरा, जेएनयू प्रशासन बताएं कि एक्ट में कहां लिखा है कि किसी फिल्म को देखने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति लेने की जरूरत है और तीसरा प्रशासन ने किस एक्ट के आधार पर छात्रों को यह नोटिस भेजा है?
आखिर में छात्रों ने लिखा है कि यहां शामिल होने वाले सभी छात्र अपनी मर्जी से देखने पहुंचे थे। हमारा मकसद किसी को नुकसान या भावनाएं आहत करना नहीं था। हमारा मकसद सिर्फ फिल्म की पटकथा को जानना था, जिसके कारण इस पर रोक लगाई गई है। केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी ) द्वारा ''इंडिया: द मोदी क्वेश्चन'' नाम की डॉक्यूमेंट्री सीरीज बैन कर दी है।