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Delhi: पूर्व सीएम रावत के खिलाफ CBI जांच का आदेश रद्द, उच्च न्यायालय ने दिया था जांच का आदेश

Wed, 04 Jan 2023 09:45 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली

सार

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश टिकाऊ नहीं है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। पीठ ने कहा, ‘अपीलकर्ता(रावत) के खिलाफ आपराधिक जांच की मांग करने वाले निर्देश और की गई टिप्पणियों को रद्द कर दिया जाता है। आदेश में यह विशेष रूप से नोट किया गया है कि सिर्फ उपरोक्त आधारों पर आदेश रद्द किए जाते हैं।
 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप की सीबीआई जांच करने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने 27 अक्तूबर 2020 को पत्रकार उमेश शर्मा और शिव प्रसाद सेमवाल के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द किया था। साथ ही भाजपा नेता के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया था।

 

शीर्ष अदालत ने नोट किया कि दोनों पत्रकारों ने अपने खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर रावत के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग नहीं की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि रावत के खिलाफ जांच या आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की कोई प्रार्थना नहीं की गई थी।

 

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश टिकाऊ नहीं है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। पीठ ने कहा, ‘अपीलकर्ता(रावत) के खिलाफ आपराधिक जांच की मांग करने वाले निर्देश और की गई टिप्पणियों को रद्द कर दिया जाता है। आदेश में यह विशेष रूप से नोट किया गया है कि सिर्फ उपरोक्त आधारों पर आदेश रद्द किए जाते हैं।

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यह था मामला

हाईकोर्ट का फैसला पत्रकारों द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर आया था, जिनमें जुलाई 2020 में उनके खिलाफ आईपीसी के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई थी। शर्मा द्वारा सोशल मीडिया पर रावत पर आरोप लगाने के बाद जालसाजी और धोखाधड़ी सहित आईपीसी के विभिन्न प्रावधान के तहत मामला दर्ज किया गया था। शर्मा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने 2016 में गौ सेवा आयोग के प्रमुख के रूप में उस राज्य में एक व्यक्ति की नियुक्ति का समर्थन करने के लिए अपने रिश्तेदारों के खातों में कथित रूप से धन हस्तांतरण किया था। रावत 2017 से 2021 के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे थे।

 

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