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मोबाइल टावर लगाने का झांसा देकर फर्जी वेबसाइट से ठगी करने वाले शातिर बदमाश दबोचे

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जियो टावर लगाने के नाम पर करते थे ठगी
- फर्जी वेबसाइट के जरिये बनाते थे शिकार, तीन बदमाश दबोचे
- एक हजार से ज्यादा लोगों को ठगा, मुख्य आरोपी बिहार का निवासी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने मोबाइल टावर लगाने का झांसा देकर एक हजार से ज्यादा लोगों को ठगने वाले तीन बदमाशों को दबोचा है। लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए फर्जी वेबसाइट का प्रयोग करते थे, जिसे इन्होंने सॉफ्टवेयर की उन्नत तकनीक से भरा हुआ था, जिससे वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर कॉल करने वाले पीड़ित लोगों को जरा भी शक नहीं होता था। पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, नौ सिम कार्ड और 12 अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड बरामद किए हैं।
द्वारका जिला पुलिस उपायुक्त एंटो अल्फोंस के मुताबिक, पकड़े गए बदमाशों की पहचान नालंदा (बिहार) निवासी संजय कुमार (28), फरीदाबाद हरियाणा निवासी अर्जुन प्रसाद (26) और संतोष कुमार (29) के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि महावीर एंक्लेव निवासी लोकेंद्र कुमार ने डाबड़ी पुलिस थाने में शिकायत दी कि उन्होंने गूगल पर मोबाइल टावर लगाने के लिए www.reliancejiotower.net नामक वेबसाइट देखी थी। इसके बाद उन्होंने वेबसाइट पर दिए गए नंबरों पर संपर्क किया और वेबसाइट पर दिए गए टावर लगवाने संबंधी फार्म को भरा। इसके बाद उनके पास info@jiotower.net से एक ईमेल मिला। इस ईमेल में टावर लेटर की मंजूरी के लिए 14,413 रुपये सिक्योरिटी की मांग की गई। रकम को उन्होंने दिए गए आंध्रा बैंक के खाते में जमा करा दिया। बैंक की ओर से मिले मेसेज में पता लगा कि उनके द्वारा जमा की गई रकम किसी अर्जुन प्रसाद के खाते में जमा हुई है। इसके बाद उन्हें शक हुआ और उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन उनके पैसे नहीं लौटाए। उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस के जरिये आरोपियों का पता लगाया। पुलिस ने मानेसर और फरीदाबाद में छापामारी करके संतोष कुमार और अर्जुन प्रसाद को धर दबोचा। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने तीसरे आरोपी और ठगी के मास्टरमाइंड संजय को नालंदा से दबोचा।
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ठगी के पैसे से कंपनी खोलना चाहता था संजय
पूछताछ में खुलासा हुआ कि संजय क्लाउड टेलिफोनी नाम से अपनी कंपनी खोलना चाहता था, जिसके लिए मोटी रकम की जरूरत थी। उसने 12वीं की पढ़ाई के बाद आईटी में डिप्लोमा में किया था और कई सॉफ्टवेयर कंपनियों में काम करने के बाद उसे तकनीक की काफी जानकारी हो गई थी। उसने फर्जी वेबसाइट बनाई और फर्जी नंबर डाले। इस वेबसाइट पर ग्राहकों द्वारा पूछे जाने वाले सभी संभावित प्रश्नों के उत्तर वाइस आर्टिस्ट से रिकॉर्ड करवाकर दर्ज कराए गए और जब भी कोई ग्राहक उन नंबरों पर बात करता तो कंप्यूटराइज सिस्टम पूछे गए सवालों के सही जवाब देता था, जिससे किसी को उन पर शक नहीं हुआ। अर्जुन और संतोष, संजय को लोगों के बैंक खातों की जानकारी 10-15 प्रतिशत की कमीशन के आधार पर देने का काम करते थे। यह गिरोह अब तक देश के विभिन्न राज्यों में एक हजार से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना चुका है।
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