हरियाणा के लिए उपयोगी
गोपाल कांडा को कोर्ट से राहत
एयरहोस्टेस गीतिका सुसाइड केस : 15 अप्रैल को नहीं होगी अदालत में पेशी
- अदालत के पिछले आदेश को कांडा ने दी थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अदालत ने एयरहोस्टेस गीतिका सुसाइड केस में हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा को राहत प्रदान की है। कांडा ने हाल ही में रोहिणी कोर्ट की एक अदालत द्वारा उनके खिलाफ जारी समन को चुनौती दी थी। इस पर अदालत ने 2 मई तक रोक लगा दी है।
रोहिणी कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजरानी ने शनिवार को कांडा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ समन जारी करने वाले अदालत के पिछले आदेश पर 2 मई तक रोक लगा दी। पिछले आदेश के मुताबिक, कांडा को 15 अप्रैल तक अदालत में पेश होना था।
इससे पहले, 19 मार्च को रोहिणी स्थित अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी एकता गाबा की अदालत ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा था कि इस मामले के तमाम साक्ष्यों को नजरअंदाज कर दिया गया है। महत्वपूर्ण गवाहों के होते हुए भी मामले को बंद करने की सिफारिश अदालत से की गई। ये तमाम खामियां पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगा रही हैं। इसी के मद्देनजर अदालत ने स्वत: कानूनी कदम उठाते हुए गोपाल गोयल कांडा और उनकी सहयोगी अरुणा चड्डा को बतौर आरोपी 15 अप्रैल को पेश होने के लिए कहा था।
इस मामले में अदालत ने दिल्ली पुलिस के तत्कालीन सहायक आयुक्त जवाहर सिंह पर कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है। कोर्ट ने कहा कि अनुराधा शर्मा (गीतिका की मां) के पति दिनेश और उनके बेटे अंकित शर्मा के बयानों को जांच अधिकारी एवं तत्कालीन सहायक आयुक्त ने जान-बूझकर गायब कर दिया था। सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त की पेंशन रोकने की सिफारिश भी की गई। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले की फाइल तलाशने का निर्देश दिया।
उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त 2005 को एयर होस्टेस 23 वर्षीय गीतिका शर्मा ने अशोक विहार स्थित अपने घर में संदिग्ध हालात में खुदकुशी कर ली थी। इस मामले में हरियाणा के तत्कालीन मंत्री गोपाल कांडा और उनकी सहायक अरुणा चड्डा को बलात्कार, गर्भपात व प्रताड़ना का आरोपी बनाया गया था। इसके ठीक छह माह बाद गीतिका की मां अनुराधा शर्मा ने खुदकुशी कर ली थी। उन्होंने सुसाइड नोट में गोपाल कांडा व अरुणा का नाम लिया था। सुसाइड नोट में कहा गया था कि कांडा व चड्डा की तरफ से उन्हें धमकाया जा रहा है।