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फतेहगढ़ जेल में छह महीने पहले ही फरारी की साजिश रच ली गई थी

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बद्दो को भगाने वाले तीन गिरफ्तार
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फतेहगढ़ जेल में छह महीने पहले रची गई थी साजिश, दिल्ली में छिपे थे तीनों आरोपी
- बदन सिंह उर्फ बद्दो की फरारी का मामला : एक आरोपी मेरठ से लड़ चुका है विधानसभा चुनाव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मेरठ के कुख्यात गैंगस्टर बदन सिंह उर्फ बद्दो की फरारी की साजिश फतेहगढ़ जेल में छह महीने पहले रची गई थी। छह महीने पहले ही तय हो गया था कि पुलिसकर्मियों को मेरठ के मुकुट महल होटल में लाया जाएगा। अपराध शाखा ने बद्दो को फरार कराने में मदद देने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर यह खुलासा किया है। ये तीनों बद्दो के दोस्त हैं और जेल में मिलाई आदि का खर्चा वही उठाते थे। एक आरोपी यूपी में मेरठ से विधानसभा का चुनाव लड़ चुका है। हालांकि, फरार होने के बाद बद्दो ने तीनों से कोई संपर्क नहीं किया है। दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी की सूचना मेरठ पुलिस को दे दी है। तीनों को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन ने बताया कि शाखा की एसटीएफ एसीपी पंकज सिंह की देखरेख में इंस्पेक्टर विकास राणा की टीम बद्दो को तलाश कर रही थी। एएसआई मुकेश त्यागी को 4 अप्रैल को बद्दो को भगाने वाले तीन आरोपियों के दिल्ली आने की सूचना मिली। इंस्पेक्टर विकास राणा, एसआई सुनील तेवतिया, मनोज व रविंद्र की टीम ने श्रीनिवासपुरी बस स्टैंड पर घेराबंदी कर मेरठ के ब्रह्मपुरी, निवासी दीपिन सूरी (39), जीत सिंह मक्कड़ उर्फ लालू मक्कड़ (49) और दशमेशनगर निवासी सोनू सहगल उर्फ अजय सहगल (46) को बृहस्पतिवार शाम गिरफ्तार कर लिया। मेरठ पुलिस ने तीनों की गिरफ्तारी पर 25-25 हजार का इनाम रखा था।
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पूछताछ में इन्होंने बताया कि ये तीनों बद्दो से मिलने फतेहगढ़ जेल जाते थे। वहीं छह महीने पहले फरारी की साजिश रची गई। बद्दो को गाजियाबाद कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया तो उसने पुलिसकर्मियों का विश्वास जीत लिया और उन्हें बहला-फुसला कर मेरठ के मुकुट महल होटल में ले गया। ये तीनों पहले से होटल में थे। यहां पुलिसकर्मियों को शराब पिलाई गई। पुलिसकर्मी बेहोश हो गए तो बद्दो होटल के बाहर खड़े बेटे सिकंदर के साथ फरार हो गया। होटल से ये जिस सेंट्रो कार में फरार हुए, उसे लेकर सरदार मिक्का होटल के बाहर पहले से खड़ा था। आरोपियों ने बताया कि इन्होंने पुलिसकर्मियों को पिलाई शराब और खाने में नींद की गोलियां मिला दी थीं।

खो-खो का राज्यस्तरीय खिलाड़ी था जीत सिंह
जीत सिंह मक्कड सरकारी स्कूल से 11वीं कक्षा तक पढ़ा है। इसके बाद वह खो-खो कोच बन गया। वह राज्यस्तरीय खिलाडी रहा है। इसके बाद वह पंजाबी फिल्म में काम करने पंचकूला चला गया। एक फिल्म में उसने मुख्य खलनायक के साथी की भूमिका निभाई थी। इसके बाद वह मेरठ लौट गया और प्रॉपर्टी डीलिंग करने लगा। करीब दस वर्ष पहले वह बद्दो के संपर्क में आया। गिरफ्तार दीपिन सूरी 12वीं तक पढ़ा है। इसके बाद वह परिवार के ट्रांसपोर्ट कारोबार में लग गया। करीब 15 वर्ष पहले वह बद्दो के संपर्क में आया। वह वर्ष 2007 में मेरठ से विधानसभा चुनाव लड़ चुका था। इसके खिलाफ मेरठ के थाना ट्रांसपोर्ट नगर में हत्या की कोशिश का मामला दर्ज है। उधर, सोनू सहगल ने मरेठ से वर्ष 1992 में बीएससी की थी। इसके बाद उसने खेल के सामान का व्यवसाय शुरू किया। इसकी मेरठ के साईपुरम में पांच स्पोर्ट्स गुड्स यूनिट हैं। वह करीब छह वर्ष पहले बद्दो के संपर्क में आया।
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बद्दो के भागने के फाद फरार थे
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें पता था कि बद्दो के भागने के बाद पुलिस उन तक भी पहुंचेगी। इस कारण वे मुकुट महल होटल से अपने घर जाने की बजाय फरार हो गए। वे मेरठ से हरिद्वार गए और वहां दो दिन रहे। इसके बाद छिपने के लिए दिल्ली आ गए। ये दक्षिण दिल्ली में छिपकर रह रहे थे।
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