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उगाही करने वाला एक लाख का इनामी बदमाश मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार

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झज्जर (हरियाणा) और हिमाचल प्रदेश के ध्यानार्थ

एक लाख का इनामी बदमाश पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार
दो सिपाहियों की बुलेट प्रूफ जैकेट में लगीं गोलियां, जवाबी फायरिंग में बदमाश घायल

हत्या के मामले में जमानत पर निकलने के बाद हो गया था फरार

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हत्या के मामले में जमानत पर जेल से निकलने के बाद प्रॉपर्टी डीलरों व कारोबारियों से उगाही करने वाले एक लाख के इनामी बदमाश को स्पेशल सेल ने पूंठकला इलाके में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। बदमाश के पैर में गोली लगी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरोपी की पहचान परमजीत दलाल उर्फ मोनू के रूप में हुई है। वर्ष 2016 में एक प्रॉपर्टी डीलर को उगाही के लिए अगवा कर उससे 90 लाख की उगाही करने के मामले में पुलिस को परमजीत की तलाश थी। बदमाश के पास से ऑटोमेटिक पिस्तौल और कारतूस के अलावा एक कार मिली है। वह हिमाचल प्रदेश में छिपकर रह रहा था। परमजीत मूलरूप से झज्जर (हरियाणा) का रहने वाला है।
पुलिस उपायुक्त संजीव यादव ने बताया कि पुलिस इस इनामी बदमाश को काफी दिनों से तलाश कर रही थी। इसी बीच पुलिस को सूचना मिली कि 6 मई की रात परमजीत पूंठकला गांव में रुपये लेने के लिए अपने सहयोगी से मिलने आ रहा है। निरीक्षक पूरन पंत और पंकज के नेतृत्व में स्पेशल सेल की दो टीमें गठित कर सेक्टर-24, रोहिणी के हेलीपैड रोड पर पुलिस ने घेराबंदी की। इसी दौरान तड़के सवा पांच बजे पुलिस ने बवाना की तरफ से आ रही एक कार को देखा, लेकिन चालक ने अपनी कार सेक्टर-24, रोहिणी की ओर मोड़ दी।
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पुलिस टीम ने तुरंत कार का पीछा किया। कुछ दूर जाने के बाद पुलिस की टीमों ने कार को घेर लिया। पुलिस ने कार में बैठे बदमाश को समर्पण करने के लिए कहा, लेकिन बदमाश ने पिस्तौल निकालकर पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। दो गोलियां सिपाही सोनू और अनिल की बुलेट प्रूफ जैकेट में लगीं। पुलिस ने जवाबी फायरिंग में बदमाश पर चार गोलियां चलाई। एक गोली बदमाश के बाएं पैर में लगी। वह भागकर मैदान में चला गया और पुलिस पर गोलीबारी करने लगा, लेकिन पुलिसकर्मियों ने बदमाश को दबोच लिया।

पुलिस की वर्दी में प्रॉपर्टी डीलर को किया अगवा
जांच में पता चला कि परमजीत ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर 2009 में मियांवाली नगर इलाके में सतीश नाम के व्यक्ति की हत्या कर दी थी। इस मामले में उसे गिरफ्तार किया गया। जुलाई 2016 में वह तीन सप्ताह की जमानत पर जेल से बाहर आया, लेकिन बाहर आने के बाद वह फरार हो गया। 12 अगस्त, 2016 को परमजीत ने अपने सहयोगी प्रदीप राणा, मोहित छाबड़ा और दीपक के साथ मिलकर राम प्रताप नाम के प्रॉपर्टी डीलर को अगवा कर लिया। परमजीत और प्रदीप ने पुलिस की वर्दी पहनकर घटना को अंजाम दिया। पहले तो आरोपियों ने पीड़ित के परिवार से 25 लाख की मांग की और बाद 90 लाख की। इस मामले में उसके तीन सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन परमजीत फरार हो गया।
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दर्ज हैं 10 आपराधिक मामले
पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। बाद में इस राशि को बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया। परमजीत मूलरूप से झज्जर का रहने वाला है। पहली बार वह वर्ष 2009 में रोहिणी साउथ इलाके में हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद वह लगातार वारदात को अंजाम देने लगा। आरोपी दिल्ली के 10 बदमाशों में से एक है। उस पर हत्या, उगाही, लूटपाट, आर्म्स एक्ट सहित दस मामले दर्ज हैं।



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