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आयुष्मान भारत योजना के तहत ठगी करने वाले गिरोह के चार गिरफ्तार

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आयुष्मान योजना में नौकरी के नाम पर ठगने वाले 4 धरे
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सरकारी नौकरी का झांसा देकर देशभर के सैकड़ों बेरोजगारों से की गई धोखाधड़ी, नियुक्ति पत्र भी भेजे
- फरीदाबाद, गुरुग्राम और अन्य जगह से दबोचे ठग, सरगना तिगांव के घर से चला रहा था धंधा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजना में नौकरी लगवाने के नाम पर बेरोजगार युवकों से ठगी करने वाले गैंग का नई दिल्ली जिला पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तिगांव, फरीदाबाद निवासी सरगना ज्ञान प्रकाश उर्फ ज्ञान नागर (30), गुरुग्राम निवासी ऋषिकांत (27), सरस्वती एन्क्लेव कादीपुर गुरुग्राम निवासी राम नारायण (28) और बैंक खाताधारक गुरुग्राम निवासी प्रवीन कुमार (22) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से कई फर्जी मुहर, लैपटॉप, प्रिंटर, मोबाइल फोन, स्पीड पोस्ट की रसीद और अन्य सामान बरामद किया गया है। पुलिस की मानें तो आरोपियों ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर सैकड़ों लोगों से ठगी की है।
नई दिल्ली जिला पुलिस उपायुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि महेंद्रगढ़, हरियाणा निवासी सुरेंद्र कुमार ने कनॉट प्लेस थाने में ठगी की शिकायत दी थी। सुरेंद्र ने पुलिस को बताया कि उसने एक नामी अखबार में आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकारी नौकरी दिलवाने का विज्ञापन देखा था। सुरेंद्र ने आरोपियों से संपर्क किया तो उसे सीधे नियुक्ति पत्र भेज दिया गया। सुरेंद्र को प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना का नियुक्ति पत्र भेजा गया था। पत्र के साथ ट्रेनिंग पीरियड और अन्य चीजों की जानकारी दी गई थी। सुरेंद्र ने आरोपियों से संपर्क किया तो उन्होंने सिक्योरिटी के नाम पर 12,500 रुपये उनके खाते में जमा कराने को कहा। सुरेंद्र ने परिजनों से बातचीत कर पहले नियुक्ति पत्र की जांच करने की ठानी।
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सुरेंद्र दिल्ली पहुंचा और दिए गए पते जीवन भारती बिल्डिंग में नियुक्ति पत्र की जांच की। वहां पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी है। सुरेंद्र की तरह कई अन्य बेरोजगार युवाओं को इसी तरह ठगा गया था। सुरेंद्र ने मामले की सूचना कनॉट प्लेस थाना पुलिस को दी। रिपोर्ट दर्ज कर जांच में एसीपी कनॉट प्लेस अखिलेश्वर यादव, थाना प्रभारी विनोद नारंग, एसआई संदीप अहलावत, अमित की टीम जुटी। जिस डाकघर से नियुक्ति पत्र पोस्ट किए गए थे, पुलिस को वहां का पता चल गया। इस बीच पुलिस को पता चला कि वारदात में तिगांव, फरीदाबाद का रहने वाला ज्ञान नागर शामिल है। वह अपने घर से ठगी का धंधा चला रहा था। इधर, ज्ञान सागर को मामले की भनक पड़ गई और वह फरार हो गया।

ज्ञान नागर की सूचना पर पकड़े गए साथी
पुलिस ने 3 मई को एक सूचना के बाद सेक्टर-14, फरीदाबाद इलाके से ज्ञान नागर को दबेाच लिया। शुरू में वह ठगी में हाथ होने से इंकार करता रहा, लेकिन बाद में अपराध कबूल कर लिया। ज्ञान से पूछताछ के बाद पुलिस ने ऋषिकांत व राम नारायण को गुरुग्राम से दबोचा। इसके बाद धोखाधड़ी के लिए बैंक खाता उपलब्ध कराने वाले प्रवीन कुमार को भी गुरुग्राम से दबोच लिया गया। इन्होंने ठगी में हाथ होने की बात कबूल ली है।
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ऋषिकांत ने दिखाया था ठगी का रास्ता
ज्ञान नागर ने बताया कि कारोबार में घाटा होने के कारण उस पर मोटा कर्ज हो गया था। उसके गांव के रहने वाले ऋषिकांत ने उसे ठगी करने का आइडिया दिया। रामनारायण के जरिये ऋषिकांत फर्जी पतों पर सिम कार्ड और बैंक खातों का इंतजाम कर ज्ञान नागर को देता था। ज्ञान नागर नामी अखबारों में सरकारी नौकरी दिलवाने का विज्ञापन देता था। जो भी इससे संपर्क करता, आरोपी नियुक्ति पत्र भेजने की बात कर उससे 12,500 रुपये सिक्योंरिटी मांगता था। बाद में नियुक्ति पत्र भेज भी दिया जाता था। वारदात के बाद आरोपी अपने मोबाइल नंबर बंद कर लेते थे। राम नारायण के जरिये ऋषिकांत दस हजार में बैंक खाता और 500 रुपये में सिम कार्ड लेता था। आगे ज्ञान को 15 हजार और एक हजार रुपये में बैंक खाता और सिम कार्ड उपलब्ध कराया जाता था।
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