दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में तैनात एक हवलदार ने लक्ष्मी नगर थाना परिसर में बने फ्लैटस की पार्किंग खुद को गोली मारकर जान दे दी। उसने कार में अपनी कनपटी पर गोली मार ली। कार से पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने अपने छोटे भाई को बच्चों और मां का ख्याल रखने की बात लिखी है।
नोट में उसने खुदकुशी करने या उसके कारणों का खुलासा नहीं किया है। शुरुआती जांच में पता चला कि हवलदार का अपनी पत्नी से कुछ दिनों से विवाद चल रहा था और उसकी पत्नी बच्चों के साथ अलग रह रही थी। लक्ष्मी नगर थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंपकर मामले की छानबीन कर रही है।
मृत हवलदार की शिनाख्त नरेंद्र भाटी के रूप में हुई है। मुलत: बुलंदशहर के जेवर के रहने वाले नरेंद्र परिवार के साथ गाजियाबाद वेब सिटी में रहते थे। परिवार में पत्नी 10 साल का बेटा, पांच साल की बेटी, मां और छोटे भाई का परिवार है। वह दिल्ली पुलिस में साल 2010 में भर्ती हुए थे। वह कई जिलों में काम करने के बाद अपराध शाखा की शकरपुर यूनिट में तैनात थे। यूनिट का कार्यालय लक्ष्मी नगर थाना परिसर में है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नरेंद्र ने शुक्रवार सुबह कार्यालय से पिस्टल जारी करवाने के बाद चला गया। अपराध शाखा में कार्यरत पुलिसकर्मियों ने दोपहर करीब 12.30 बजे गोली चलने की आवाज सुनी। पार्किंग परिसर में कार में नरेंद्र को मृत देखकर पुलिसकर्मियों ने इसकी जानकारी पुलिस के आला अधिकारियों को दी। उसके बाद लक्ष्मी नगर थाने को घटना की जानकारी दी गई।
घटना की जानकारी उनके परिवार वालों को बी दी गई। छानबीन के दौरान पुलिस ने देखा कि उन्होंने अपने कनपटी पर गोली मारी थी। पुलिस को कार से आधे पन्ने का एक सुसाइड नोट मिला। जिसमें उन्होंने खुदकुशी करने या फिर उसके कारणों के बारे में कुछ भी नहीं लिखा था। छोटे भाई को संबोधित करते हुए नरेंद्र ने उन्हें बच्चों और मां का ख्याल रखने के लिए कहा था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया।
पत्नी से चल रहा था विवाद
मामले की छानबीन के दौरान पुलिस ने नरेंद्र के छोटे भाई से पूछताछ की। उसका छोटा भाई एक निजी कंपनी में काम करता है। परिवार वालों से पुलिस को पता चला कि नरेंद्र का अपनी पत्नी से विवाद चल रहा था। वह कुछ महीने से दोनों बच्चों को लेकर अलग रह रही थी। इस विवाद को लेकर नरेंद्र परेशान थे।
परिवार वालों ने बताया कि उन्हें इस बात पर यकीन नहीं हो रहा है कि विवाद की वजह से उन्होंने इतनी बड़ा कदम उठा सकते हैं। वह गाजियाबाद में एक मकान का निर्माण कार्य करवा रहे थे। उनके साथ काम करने वाले साथियों ने बताया कि वह काम को लेकर काफी ईमानदार थे और सक्रिय थे। उन्होंने कहा कि काम के दौरान नरेंद्र को कभी तनाव में नहीं देखा।