नई दिल्ली। हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि शादी का टूटना किसी की जीत या हार नहीं, बल्कि यह कानूनी मान्यता है कि रिश्ते में अब सुधार की कोई संभावना नहीं बची। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल व न्यायमूर्ति रेणु भटनागर की पीठ ने यह भी कहा कि जब पति या पत्नी अपने पार्टनर के करीबी रिश्तेदारों के खिलाफ आरोप लगाते हैं, तो इसका मतलब होता है कि विवाह में किसी भी तरह की वापसी संभव नहीं है। यह फैसला तब आया जब अदालत ने पारिवारिक अदालत के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें पत्नी की क्रूरता के आरोपों पर पति की याचिका को अस्वीकार कर दिया गया था। पति ने अपनी पत्नी पर मानसिक और शारीरिक क्रूरता का आरोप लगाया था, साथ ही यह दावा किया कि पत्नी ने न सिर्फ उसे, बल्कि उसके परिवार का भी लगातार मानसिक उत्पीड़न किया।