उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वे ‘संपूर्णता’ में इसकी संवैधानिक वैधता को मान्यता देते हैं।
हालांकि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अधिनियम में संबंधित पक्ष से आशय कारोबार से जुड़ा कोई व्यक्ति होना चाहिए। इसी के साथ न्यायालय ने विभिन्न कंपनियों द्वारा आईबीसी के कई प्रावधानों को चुनौती देने वाली तमाम याचिकाओं को खारिज कर दिया।