दिल्ली मेट्रो फेज-1 की रेड और ब्लू लाइन पर दौड़ने वाली मेट्रो में भी दूसरी लाइनों की मेट्रो की तर्ज पर सभी सुविधाएं होंगी। सफर में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए मोबाइल, लैपटॉप चार्जिंग, डायनमिक रूट मैप (एलसीडी), नए इलेक्ट्रिक पैनल, सीसीटीवी कैमरे के साथ फर्श भी बदल दिए गए हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक डॉ. मंगू सिंह ने सोमवार को यमुना बैंक डिपो में पहली नवीनीकृत मेट्रो का अनावरण किया। डीएमआरसी की ओर से 70 ऐसी ट्रेनों का नवीनीकरण किया जाएगा। इससे यात्रियों को सुरक्षित सफर के साथ सभी सुविधाएं भी मिलेंगी।
डीएमआरसी की ओर से विशेष अभियान के तहत पुरानी मेट्रो ट्रेनों का नवीनीकरण किया जा रहा है। इसके तहत 2002 से 2007 के बीच पहले फेज में खरीदी गई मेट्रो को दोबारा यात्रियों की जरूरत के लिहाज से नया रूप दिया गया है। एक मेट्रो ट्रेन का कार्यकाल औसत 30 वर्ष का है। मिड लाइफ रिफर्बिशमेंट के तहत 14 से 19 साल की आयु पूरी कर चुकी मेट्रो को नवीनीकृत की दिशा में पहल की गई है। नई सुविधाओं के साथ रूपांतरित ट्रेनों को मौजूदा मेट्रो की तर्ज पर विकसित किया गया है।
खस्ताहाल फर्श पर एड़ी मुंडने की नहीं सताएगी चिंता
फर्श में कई जगहों पर दरारें और उभार दिखने लगे थे। यात्रियों को सफर के दौरान कई बार एड़ी मुड़ने और कोच के अंदर कई जगहों पर खराबी की शिकायतें मिल रही थीं। यात्री सुरक्षा और कोच के अंदर की खूबसूरती को बनाए रखने के लिए फर्श को आधुनिक कंपोजिट फाइबर बोर्ड में बदल दिया गया है।
बदल दिए गए इलेक्ट्रिक पैनल भी
सैलून और कैब के अंदर के पैनल का भी मरम्मत किया गया, जबकि कैब हेड मास्क को भी नए कोच की तरह बना दिया गया है। खरोंच, डेंट या रेट्रोफिट कार्यों के तहत अंदर की दीवार और छतों के साथ-साथ दूसरे हिस्सों की कमियों को दूर किया गया है।
एक ट्रेन के नवीनीकरण पर चार करोड़ से अधिक की लागत
डीएमआरसी के कार्यकारी निदेशक (कॉरपोरेट कम्युनिकेशन) अनुज दयाल के मुताबिक सभी मेट्रो को एक साथ रिफर्बिश नहीं किया जा सकता है। हर महीने एक मेट्रो को नवीनीकृत करने के बाद दोबारा ट्रैक पर उतारा जाएगा। इसके तहत लैपटॉप, मोबाइल चार्जर, महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे और एलसीडी रूट मैप भी लगाए गए हैं। 10 ट्रेनों के नवीनीकरण में 40-45 करोड़ तक की लागत आएगी। शेष 60 ट्रेनों के नवीनीकरण के लिए भी टेंडर निकाला गया है। सामान्य तौर पर मेट्रो का 30 वर्ष का जीवनकाल है। यात्रियों की सुविधा के लिहाज से हर तीन दिन, 15 दिन, 45 दिन, छह महीने, हर साल, चार साल, आठ साल पर सभी पहुलओं की बारीकी से जांच की जाती हैं, ताकि सुरक्षा या सुविधाओं के लिहाज से कोई कमी न रहे।
मिड लाइफ रिफर्बिशमेंट के दौरान मेट्रो में किए गए कई बदलाव
. इलेक्ट्रिक पैनल में सुधार से कार्यशीलता बढ़ेगी
. मेक शिफ्ट व्यवस्था के तहत सीलबंद इलेक्ट्रिक पैनलों में किए गए तब्दील
. स्टीकर के बजाय अब मेट्रो में एलसीडी आधारित डायनामिक रूट मैप लगाए गए हैं। इससे यात्रियों को हर वक्त की लाइव सूचना मिलेगी।
. 50 फीसदी स्टेटिक रूट मैप को एलसीडी में बदल दिया जाएगा।
. हरेक कोच में 4-4 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
. ओवर हेड हाई-टेंशन लाइनों की निगरानी के लिए कैटेनरी कैमरे लगाए गए
. ट्रेन ऑपरेटर को प्लेटफॉर्म के पिछले हिस्से को देखने के लिए मेट्रो कोच के दोनों किनारे पर भी प्लेटफॉर्म कैमरे लगाए गए हैं।
. फायर डिटेक्शन सिस्टम की सुविधा भी इसमें जोड़ी गई है ताकि किसी भी विषय परिस्थिति में यात्रियों को सुरक्षित सफर का मौका मिले
. अचानक गर्मी में बढ़ोतरी या धुंआ निकलने पर अलार्म बजते ही इमरजेंसी वेंटिलेशन मोड में एसी का संचालन होगा।
. मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट लगाए गए हैं। प्रत्येक दो दो सीटों के पास यह सुविधा दी गई है।
अगले साल सितंबर तक 10 मेट्रो का हो जाएगा नवीनीकरण
डीएमआरसी के कार्यकारी निदेशक (कॉरपोरेट कम्युनिकेशन) अनुज दयाल के मुताबिक यमुना बैंक डिपो में सात जबकि शास्त्री पार्क डिपो में तीन मेट्रो नवीनीकरण का कार्य एस्कॉर्टस लिमिटेड सहित दूसरी एजेंसियों के सहयोग से किया जा रहा है। सितंबर 2022 तक 10 मेट्रो ट्रेनों को पूरी तरह से नवीनीकृत किए जाने की उम्मीद है।