-2017 में विवाह करने वाली महिला ने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया था
नई दिल्ली। तीस हजारी स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा, महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा से सुरक्षा कानून पति को परेशान करने का औजार नहीं है और इसे दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रुति शर्मा ने वर्ष 2018 में दर्ज एक मामले को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। वर्ष 2017 में विवाह करने वाली महिला ने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज किया था। महिला उसी वर्ष कनाडा चली गई और बाद में वहां की नागरिकता प्राप्त कर ली। दोनों का तलाक भी हो गया। ऐसे में अदालत ने पाया कि महिला को कई अवसर दिए जाने के बावजूद भी वह सात वर्ष तक अपने मामले में पेश नहीं हुई। प्रतिवादी की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि शिकायतकर्ता महिला अदालत का समय बर्बाद कर रही थी और विदेश में आराम से जीवन व्यतीत कर रही थी। कोर्ट ने इसे सुविधा अनुसार उत्पीड़न बताया। अदालत ने महिला को लग्जरी लिटिगेंट (विलासिता वादी) कहते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी।